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अंतस : ज़रा ठहरिए- पुस्तक समीक्षा: विशाल चंद

पुस्तक- अंतस : ज़रा ठहरिए 

लेखक- लवकुश कुमार 

प्रकाशक- Notion Press 

 

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में ठहरना लगभग भूल चुके हैं हम। ऐसे समय में "अंतस" एक ऐसी पुस्तक बनकर सामने आती है, जो न सिर्फ हमें रुकने के लिए कहती है साथ ही भीतर झांकने का साहस भी देती है।

इस पुस्तक को पढ़ने से पहले मुझे लगा था कि यह एक सामान्य सेल्फ हेल्प किताब जैसी होगी लेकिन जैसे-जैसे मैं इसके पन्नों में आगे बढ़ता गया। यह अनुभव कहीं अधिक व्यक्तिगत और गहरा होता चला गया। लेखक ने रोज़मर्रा की साधारण लगने वाली घटनाओं के माध्यम से जीवन के बड़े सवालों को बेहद सहजता से उठाया है।

लेखक की सबसे बड़ी ताकत उनकी संवेदनशीलता है। वह किताबों और लेखकों के महत्व को जिस आत्मीयता से प्रस्तुत करते हैं। वह कहीं न कहीं सीधे दिल तक पहुंचती है। पुस्तक में विभिन्न किताबों, फिल्मों और विचारों का ज़िक्र न केवल पाठक की जिज्ञासा बढ़ाता है बल्कि उसकी सोच के दायरे को भी विस्तृत करता है।

इस पुस्तक की एक और खासियत इसके छोटे-छोटे प्रसंग और उद्धरण हैं। जो कम शब्दों में गहरी बात कह जाते हैं। एक जगह लेखक एक चिड़िया का उदाहरण देते हैं जो जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए अपनी चोंच में पानी भरकर लाती है। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़े बदलाव का हिस्सा बन सकती हैं। सिर्फ दर्शक बनकर रहने से बेहतर है कुछ करना।

संक्षेप में -  

  • यह किताब रोज़मर्रा की छोटी-छोटी चीज़ों में छिपे बड़े सवालों को सामने लाती है और हमें ठहरकर अपनी ही ज़िंदगी को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करती है।
  • अलग-अलग किताबों, फिल्मों और विचारों के ज़िक्र न सिर्फ इस पुस्तक को पढ़ने की इच्छा जगाते हैं, बल्कि साथ ही हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं।
  • मेरे लिए यह पुस्तक केवल पढ़ने का अनुभव नहीं रही, बल्कि खुद से जुड़ने की एक प्रक्रिया बन गई। यह हमें लिखने, पढ़ने, अपने विचार खुलकर रखने, असहमति दर्ज करने और दूसरों के विचारों का सम्मान करने की सीख देती है।
  • कुल मिलाकर अंतस : ज़रा ठहरिए एक सधी हुई, प्रेरणादायक और भीतर तक असर छोड़ने वाली पुस्तक है। जिसे हर उस व्यक्ति को पढ़ना चाहिए जो अपने जीवन को थोड़ी गहराई से समझना चाहता है।

पुस्तक से कुछ उद्धरण - 

" वह हर इंसान सम्मान के योग्य है जो अपना कार्य

ज़िम्मेदारी और ईमानदारी से कर रहा है भले ही आपको उससे कोई

व्यक्तिगत फायदा न हो, इसकी परिणति ऐसे होती है कि सम्मान की

चाह में अन्य लोग भी ज़िम्मेदारी से अपना काम करने को प्रेरित होते हैं"

 

"अपने संसाधनो / धन / समय का एक हिस्सा परोपकार मे जरूर

लगाएँ, आपकी आय कम हो या ज्यादा उसमे दूसरों के लिए कुछ

कर पाने की गुंजाइश जरूर रखें, ये न हो कि पूरा वक़्त तथाकथित

अपनों के लिए चीजें और सुरक्षा खरीदने मे या उसकी तैयारी में लगा

दिया, एक-एक दिन को सार्थक करें, जिसमे व्यायाम, अध्ययन, और

जरूरतमन्द की मदद जरूर से शामिल हों, आप कितना भी वंचित

महसूस कर लें, ऐसे लोग भी हैं जो आपसे भी ज्यादा वंचित हैं, उनके

लिए कुछ काम करके, एक जरूरी उदाहरण बनें।"

 

"जब जीवन मे कोई उद्देश्य न दिखे तब एक काम किया जा सकता है,

है, जरूरतमन्द लोगों की निस्वार्थ सेवा, उनमे सबसे ऊपर जिस बात को

मैं रखता हूँ, वह है लोगों को शिक्षित करना, उन्हे लोगों की तकलीफों

को लेकर संवेदित करना, उनकी समझ पर काम करना, उन्हे मेहनत,

उत्कृष्टता और हुनर के लिए तैयार करना, उन तक बड़े बड़े लोगों की

जीवनियाँ और प्रेरक प्रसंग पहुंचाना, उन तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाना"

 

"सबसे बड़ा पाप अन्याय को देखकर भी चुप रहना है।"

- महात्मा गांधी

 

"जो इंसान अपनी समझ और आकांक्षाएं साझा नहीं करना चाहता वो

समाज से अपनी सहूलियत की दिशा की अपेक्षा कैसे कर सकता है! बिना

किसी पूर्वाग्रह के और बिना इस बात की चिंता किए कि लोग मेरे बारे में

क्या सोचेंगे बेधड़क होकर अपनी बात रखिए और दूसरों को भी हिम्मत

दीजिए, जो कुछ महसूस कर रहें उसे सामने व्यक्त करने का |

आपका एक लाइन का इनपुट भी मायने रखता है।"

#opinion_matters

 

"एक उपाय बाहर के प्रभाव को न्यूट्रल करने का, वह है अपने घर मे

अपनी क्षमता में एक पुस्तकालय का निर्माण करना जिसमे देश दुनिया

का उत्कृष्ट साहित्य हो और हो जीवनियाँ दुनिया के महान लोगों की,

जिन्होने आजादी और गरिमा के लिए जीवन भर संघर्ष किया, और

दुनिया को एक बेहतर जगह बनाया, अपने जीवन मे उत्कृष्ट कार्य करके

आनंद प्राप्त किया, ईमानदारी, बहादुरी और करुणा का जीवन जिया,

ताकि बच्चों को जीवन के लिए सही आदर्श मिल सकें |"

 

उक्त पुस्तक निम्नलिखित लिंक से क्रय की जा सकती है :- https://notionpress.com/in/read/antas

                                                                                   Amazon link

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विशाल चन्द जी समाजशास्त्र के शोधार्थी, पाठक और संवेदनशील शिक्षार्थी हैं। नवीन ज्ञान अर्जन और सतत सीखना आपके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। पुस्तकों का पठन और संग्रहण आपको विशेष प्रिय है।

आपके भीतर एक घुमक्कड़ चेतना भी सक्रिय है, जो आपको नए लोगों, स्थानों और अनुभवों से जोड़ती रहती है। बागवानी आपके लिए प्रकृति से संवाद का माध्यम है।

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