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संवाद में अकुशलता - मानवीय संबंधों में दिक्कत की जड़

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है क्या कि आप अपना पक्ष रखना चाहते/चाहती हों और सामने वाले इंसान ने बात करना ही बंद कर दिया हो, संचार के साधनों को ही बंद कर दिया हो, आईये पड़ताल का विनम्र प्रयास करते हैं:

जैसा आपके साथ हुआ ऐसा ही काफी लोगों के साथ हुआ है क्योंकि समय के साथ कुछ भ्रम लोगों के मन में अपनी पैठ बना चुके हैं, कई लोगों से चर्चा करने पर कुछ बातें सामने आई हैं जैसे कि -

  • काफी लोगों को लगता है कि यदि कोई उनके प्रस्ताव पर सोचने के लिए समय मांग रहा है तो वह उन्हें टाल रहा है| इस तरह के पूर्वाग्रह में एक प्रक्रियागत खामी है, वह खामी यह है कि जब हम अपना कोई प्रस्ताव किसी के सामने रखते हैं तो संभावना रहती है कि हमने सारे पहलुओं पर सोच लिया हो लेकिन हम भूल जाते हैं कि सामने वाला इंसान भी तो उस पर समय लेकर सोचेगा
  • एक पूर्वाग्रह यह भी रहता है कि यदि हम सामने वाले से अनुमति मांगते हैं तो उधर से असहमति मिलने पर हम विकल्पहीन हो सकते हैं और इस पूर्वाग्रह के चलते हम उचित अनुमति लिए बिना ही वह काम कर डालते हैं और नतीजा होता है संबंधों में खटास और कार्यवाही | 
  • जब हम इस पूर्वाग्रह में होते हैं कि सामने वाला हमारा भला नहीं चाहता तो हम अपने उद्देश्य को छिपाने लगते हैं और अपने प्रस्ताव के उद्देश्य को वास्तविकता से इतर कुछ और ही  प्रस्तुत करते हैं और इससे सम्भावना बढ़ जाती है कि हम अपना प्रस्ताव मजबूती से न रख पाएं और चर्चा अनावश्यक रूप से लम्बी खिंच जाये और गलत दिशा में चली जाये|

अतः यह प्रयास हो कि हम पूर्वाग्रहों के दबाव में आये बिना सहजता से सच बोलें और सामने वाले विचार करने, अपने बात रखने का अवसर दें और संवाद का माहौल बनाएं|

 

- लवकुश कुमार


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लवकुश कुमार 


विभिन्न समाचार पत्रों और पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रिपोर्ट्स और दस्तावेजों पर आधारित और जन जागरूकता के उद्देश्य से संकलित 


लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं |

 

 

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