एक गायक की भूमिका
एक गायक सिर्फ सुरों, बोल, भावनाओं और हृदय के उद्गारों का संवाहक नहीं होता, वह लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाता है और साथ मे होता है संगीत|
उसकी आवाज़ में वो ताकत होती है जो बिना भौतिक स्पर्श दिल को छू ले।
जब इंसान खुश होता है तो संगीत और गीत जश्न बन जाते हैं और जब निराश हो तो वही गाने मरहम बनकर दर्द कम कर देते हैं, आशा और उत्साह जगा देते हैं|
गायक और गीतकार हमारे जज़्बातों की ज़ुबान होते हैं, जो बात हम कह नहीं पाते, वही बात एक गीतकार, गायक की आवाज के माध्यम से एक गाने में कह जाता है। मानवीय प्रेम और जुड़ाव की पहली धड़कन से लेकर जुदाई/अलगाव के आँसू तक, हर लम्हे का साथी बन सकता है एक गीत|
सफर में, अकेलेपन में, त्यौहार में - गायक की आवाज़ और संगीतकर का संगीत हमारे साथ चलते हैं और यादें बना देते हैं|
समाज में भी गायक का बड़ा योगदान होता है, वह अपनी आवाज़ से संस्कृति को जिंदा रखता है लोकगीतों और भजनों को नई पीढ़ी तक पहुँचाता है। कई बार उसके गाने हिम्मत देते हैं, एकता का संदेश देते हैं और भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में कुछ सुकून दे जाते हैं।
ये, वह काम है जो कम लोग कर पाते हैं - दर्द में संबल देना और खामोशी को आवाज़ दे देना। इसीलिए एक सच्चा गायक सिर्फ स्टेज पर नहीं गाता, वो लाखों लोगों के दिल में बस जाता है।
जैसे: अरिजीत सिंह, किशोर कुमार, भारत रत्न लता मंगेशकर जी सहित अनेक गायकों ने अपनी आवाज़ से कई दशकों तक देश को जोड़ा।
गायक वह क्षमता रखता रखता है जो सुरों से दिलों को जोड़ दे। खुशी में जश्न, गम में मरहम और यादों में साथी बन जाए। वह अपनी आवाज़ और गीतकार के लिखे बोल से वह बात कह देता है जो हम अपने लफ्ज़ों से नहीं कह पाते। इसीलिए गायक सिर्फ कलाकार नहीं, हमारी रोज़ की ज़िंदगी का सुकून होता है।
संगीत हमारी संस्कृति, देश की पहचान को बनाए रखता है। अच्छा संगीत और मनमोहक बोल हमें हमारे अंदर की विराटता और सूक्ष्म विश्लेषण से परिचित करवाते हैं|
इसीलिए यदि आप भी अपने काम से लोगों को सुकून और उम्मीद देना चाहें तो संगीतकार। गायक या गीतकार बनने के बारे में विचार किया जा सकता है|
उदाहरण चाहिए तो बस एक लाइन लिखिए वेब सर्च में, अपनी जरूरत के अनुसार, "जीवन पर आधारित कुछ बेहतरीन गाने", फिर आएगी एक सूची जिसके गाने सुनने पर मिल सकता है समाधान आपकी दुविधाओं को और चैन आपके बेचैन मन को |
कुछ गाने ये भी "एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल" और "जिंदगी एक सफर है सुहाना" आदि
शुभकामनाएं
- प्रिया
बरेली, उत्तर प्रदेश
प्रिया जी स्नातक की विद्यार्थी हैं और सिविल सेवाओं की परीक्षा के लिए खुद को तैयार कर रही हैं|
आप कविताओं द्वारा स्वयं के विचारों और भावनाओं को व्यक्त करती हैं | समाज मे आपकी गहरी रुचि है और लोगों की मदद करने मे आपको एक अनोखी अनुभूति महसूस होती है, जो आपको और बेहतर करने को प्रेरित करती है|
इस बाबत कवि भवानी प्रसाद मिश्र जी की कुछ पंक्तियाँ याद आती हैं :
कुछ लिख के सो,
कुछ पढ़ के सो,
तू जिस जगह जागा सवेरे,
उस जगह से बढ़ के सो"
नए कवियों को निर्देशित करती वरिष्ठ कवि महेश चन्द्र पुनेठा जी की कविता, "पहली कोशिश" भी प्रासंगिक है:
मैं न लिख पाऊँ एक अच्छी कविता
दुनिया एक इंच इधर से उधर नहीं होगी
गर मैं न जी पाऊँ कविता
दुनिया में अंधेरा कुछ और बढ़ जाएगा
इसलिए मेरी पहली कोशिश है
कि मरने न पाए मेरे भीतर की कविता।
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें
फीडबैक / प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, के लिए यहाँ क्लिक करें |
शुभकामनाएं
पहुंची तो सड़क मेरे गांव
लेकिन ले गई रास्ते की छांव।।
ऊपर तो है सुंदर कंक्रीट
परंतु अंदर है गंभीर घाव।।
कही कट रहे पेड़
कही कट रहे पहाड़
जंगलों से निकल जानवर
शहरों में रहे दहाड़
पेड़ो पर विचरते थे जहा खग।
थमते थे छाव के लिए पग ।।
गिलहरी भी कहा दिख रही
कहा छोटी चौपाल लग रही
अलग सुनसानी सी पसर रही
नदिया,पर्वत पहाड़ी भी डर रही
प्रकृति में अतिक्रमण हम कर रहे।
स्वयं को विकास पुरुष से धर रहे।।
आर्थिकी को ही प्राथमिकता कर रहे
धैर्य न हम धर रहे ।।
विनाश को स्वयं आमंत्रण कर रहे
-डॉ अनिल वर्मा
लेखक कृषि रसायन में परास्नातक हैं और गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर उत्तराखंड में कृषि रसायन पर शोध कार्य कर चुके हैं।
ये लेखक के निजी विचार हैं और समाज की बेहतरी के प्रयोजन से लिखे गए हैं।