सुश्री सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं, इस वेबसाइट पर प्रकाशित उनकी रचनाओं से जीवन, मानव संवेदना एवं मानव जीवन के संघर्षों की एक बेहतर समझ हांसिल की जा सकती है, वो बताती हैं कि उनकी किसी रचना से यदि कोई एक व्यक्ति भी लाभान्वित हो जाये, उसे कुछ स्पष्टता, कुछ साहस मिल जाये, या उसमे लोगों की/समाज की दिक्कतों के प्रति संवेदना जाग्रत हो जाये तो वो अपनी रचना को सफल मानेंगी, उनका विश्वास है कि समाज से पाने की कामना से बेहतर है समाज को कुछ देने के प्रयास जिससे शांति और स्वतंत्रता का दायरा बढे |
ऐसे इंसान सतत प्रेरणा के श्रोत हैं, इन्हे पढ़कर, इनसे बात करके खूब काम करने का उत्साह मिलता है |
ईमेल- saumyajbr123@gmail.com"
डॉ अनिल वर्मा, कृषि रसायन में परास्नातक हैं और गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर उत्तराखंड में कृषि रसायन पर शोध कार्य कर चुके हैं।
इनके द्वारा शिक्षण और साहित्य के अध्ययन/अध्यापन का अनुभव एक बेहतर समाज के लिए उपयोगी है |
इस वेबसाइट पर लेखक द्वारा व्यक्त विचार लेखक/कवि के निजी विचार हैं और लेखों पर प्रतिक्रियाएं, फीडबैक फॉर्म के जरिये दी जा सकती हैं|
लवकुश कुमार, भौतिकी में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली से परास्नातक हैं और वर्तमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग में अराजपत्रित अधिकारी हैं।
इनके द्वारा माध्यमिक स्तर के छात्रों/छात्राओं के लिए भौतिकी से जुड़ी कुछ सामग्री भी साझा की गयी है जो बहुत उपयोगी साबित होगी ऐसा इनका विश्वास है और इस विश्वास के साथ की अच्छा साहित्य समाज में मानवता के घटक, संवेदनशीलता, विचारशीलता, बंधुत्व और चेतना के उन्नयन में योगदान करता है ; साहित्यिक लेख, विचार और समीक्षाएं भी साझा की गयी हैं |
लेखक का विश्वास है की सूचना के इस युग में समावेशी प्रकृति के और समाज में मानवता, उत्कृष्टता और बंधुत्व को प्रोत्साहित करने वाले विचारों पर ज्यादा से ज्यादा जोर देना जरुरी है|
“बदलाव पर बात फिर बदलाव के लिए जरुरी काम भी”
समय समय पर अलग अलग साहित्यकारों और कवियों ने मानवीय मूल्यों पर अपने-2 तरीकों से बात की और अपने-2 विचार रखे और समाज के अलग अलग तबके के लोगों को प्रभावित किया, जितने ज्यादा लोग मानवीय मूल्यों की बात करेंगे उतना ही इनको महत्व मिलेगा समाज द्वारा, पूरी बात है की आप प्रोत्साहित क्या करते हैं समाज में अतः लेखक का विश्वास है की अगर ज्यादा से ज्यादा लोग अपने तरीके/ शैली में मानवीय मूल्यों पर बात करेंगे / लिखेंगे/ प्रोत्साहित तो समाज में संवेदनशीलता, विचारशीलता, बंधुत्व और चेतना का विकास बढेगा |
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