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पटकनी - ममता कालिया |
सह जीवन |
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भिखारिन - जयशंकर प्रसाद |
साहब, दो दिन में एक पैसा तो दिया नहीं, गाली क्यों देते हो ? |
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हींग वाला - सुभद्रा कुमारी चौहान |
बाहर माहौल खराब है अम्मा ........ |
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अंधे : खुदा के बन्दे - रमेश बत्रा |
जो आदमी होकर आदमी को नहीं पहचानते ......... अँधा हो चूका हूँ, मोहताज नहीं होना चाहता | |
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अनुभवी - रमेश बत्रा |
बाप मर गया है ....... |
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नदियाँ और समुद्र - रामधारी सिंह दिनकर |
गंभीर और मर्यादावान |
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चलोगे- रमेश बत्रा |
आप तो ऐसे कह रहे हैं जैसे कि मै कोई मुहर मांग लूँगा |
आनंद लीजिये इन कहानियों का चेतना को छूने वाली कथावस्तु और मन को बाँधने वाली आवाज में |
धन्यवाद की पात्र हैं वह लेखिका/लेखिका जिन्होंने ये कहानियां लिखी और वह वक्ता यानी नम्रता जी जिन्होंने अपनी आवाज में इन्हें हमारे लिए और सुलभ तथा रोचक बनाया |
बोलते तो सब हैं एक बोलना ये भी है कि आप किसी चेतना को छूने वाली कहानी को आवाज दें |
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें
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शुभकामनाएं
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"कहूँ कहानी"- रमेश बत्रा |
https://www.youtube.com/watch?v=cYWZsheaqkE | एक लाजा है वो बहोत गलीब है |
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"परिचित"- डॉ. रामनिवास मानव |
https://www.youtube.com/watch?v=96H4nrWtfXk | दस के नोट |
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"नन्दा"-कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर |
https://www.youtube.com/watch?v=ql3mQ9zapXA | नंदा उस नींद में सो रहा था जिससे कोई नहीं जागा |
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भोज, प्रतिभा राय |
https://www.youtube.com/watch?v=c4_P-QvrcTM&t=1s | एक दिन होने वाले भोज की तैयारी पिछले 10 दिनों से |
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गालियां- चंद्रधर शर्मा गुलेरी |
https://www.youtube.com/watch?v=jGDKC4Lez5g | क्योंकि अब गलियाँ चुभती हैं | |
आनंद लीजिये इन कहानियों का चेतना को छूने वाली कथावस्तु और मन को बाँधने वाली आवाज में |
धन्यवाद की पात्र हैं वह लेखिका/लेखिका जिन्होंने ये कहानियां लिखी और वह वक्ता यानी नम्रता जी जिन्होंने अपनी आवाज में इन्हें हमारे लिए और सुलभ तथा रोचक बनाया |
बोलते तो सब हैं एक बोलना ये भी है कि आप किसी चेतना को छूने वाली कहानी को आवाज दें |
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शुभकामनाएं
| जिनावर - चित्रा मुगदल | https://www.youtube.com/watch?v=2xj4XDVv6aE | सारांश 3 मिनट के बाद शुरू होता है | |
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दौड़ लघु उपन्यास- ममता कालिया |
https://www.youtube.com/watch?v=AKruXIgPdvA | एक लघु उपन्यास |
| कामायनी - जयशंकर प्रसाद | https://www.youtube.com/watch?v=9PFfsgicNw4 | स्वर कृतिम बुद्धिमत्ता |
| मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी - मंत्र | https://www.youtube.com/watch?v=9WmyGjf739w | पूरी कहानी |
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निर्मोही-ममता कालिया की कहानी |
https://www.youtube.com/watch?v=AypnekxuCaI | अपनी रचनाओं में ममता कालिया जी न केवल महिलाओं से जुड़े सवाल उठाती हैं, बल्कि उन्होंने उनके उत्तर देने की भी कोशिश की हैं। |
आनंद लीजिये इन रचनाओं का और अपनी सोच को विस्तार दीजिये |
धन्यवाद की पात्र हैं वह लेखिका/लेखक जिन्होंने ये कहानियां लिखी और वह वक्ता जिन्होंने अपनी आवाज में इनके सारांश को हमारे लिए और सुलभ तथा रोचक बनाया|
बोलते तो सब हैं एक बोलना ये भी है कि आप किसी चेतना को छूने वाली कहानी को आवाज दें |
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शुभकामनाएं
| परिंदा - सुनीता त्यागी | https://www.youtube.com/watch?v=BWUyL5xtPGU |
| तस्कीं को हम न रोयें - ममता कालिया | https://www.youtube.com/watch?v=B_mpmpd5VeA |
| थोड़ा सा प्रगतिशील - ममता कालिया | https://www.youtube.com/watch?v=0tdKgYiLTqs |
| परली पार - ममता कालिया | https://www.youtube.com/watch?v=MaXpAwVXnOc |
| पंडिताइन - ममता कालिया | https://www.youtube.com/watch?v=JgJW0VmNNlU |
आनंद लीजिये इन कहानियों का चेतना को छूने वाली कथावस्तु और मन को बाँधने वाली आवाज में |
धन्यवाद की पात्र हैं वह लेखिका जिन्होंने ये कहानियां लिखी और वह वक्ता यानी नम्रता जी जिन्होंने अपनी आवाज में इन्हें हमारे लिए और सुलभ तथा रोचक बनाया |
बोलते तो सब हैं एक बोलना ये भी है कि आप किसी चेतना को छूने वाली कहानी को आवाज दें |
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल कर दें
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शुभकामनाएं
.."हमारे जीवन में घटने वाली छोटी-सी घटना में जीवन की विराट व्याख्या छिपी रहती है। इस विराट कथ्य को बिम्बों में बांध लेना ही लघु कथा है....."
अम्मा अपने लिए दवा ले रही थी, तभी दुकान पर एक व्यक्ति अपना पर्चा आगे कर दिया। दुकानदार ने दवा देते हुए कहा, यह बहुत बढ़िया टॉनिक है। इस से दिमाग तेज होता है, ब्रेन शार्प बनता है। याददाश्त ठीक रहती है...। बच्चों के लिए तो बहुत ही अच्छी दवा है। वह व्यक्ति दवा लेकर चला गया। अम्मा उत्सुकतावश दुकानदार से पूछी, बेटा इसके प्रयोग से याददाश्त कितनी अच्छी हो सकती है? क्या बहुत पीछे की बातें भी..., जैसे बचपन की बातें भी याद आ सकती है ?
दुकानदार मुस्कुराते हुए कहा-आप भी ना अम्मा! बच्चों की तरह बातें कर रही हैं। इस उम्र में आप बचपन के दिनों में लौटना चाहती हैं। नहीं बेटा! मैं अपने लिए नहीं, अपने बच्चों के लिए पूछ रही थी। क्या इस दवा से उन्हें अपने बचपन की याद आ सकती है? क्या इतनी कारगर दवा है? दुकानदार पुनः मुस्कुरा कर बोला, नहीं अम्मा! ऐसा तो नहीं हो सकता ! मगर आप ऐसा क्यों पूछ रही हैं? अम्मा बेचारी परेशान और बीमार थी। दुकानदार से जाते- जाते, धीरे-धीरे कहने लगी, क्या करें..! बच्चे सबूत मांगते हैं... कि, हमने उनके लिए किया ही क्या है ?
ईमेल- ssinhavns@gmail.com
आदरणीय सुषमा सिन्हा जी का जन्म वर्ष 1962 में गया (बिहार) में हुआ, इन्होने बीए ऑनर्स (हिंदी), डी. सी. एच., इग्नू (वाराणसी) उर्दू डिप्लोमा में शिक्षा प्राप्त की|
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में विगत 32 वर्षों से कविता, लघु कथा, कहानी आदि प्रकाशित । इनकी प्रकाशित पुस्तकें निम्नलिखित हैं :-
चार लघुकथा संग्रह
1. औरत (2004)
2. राह चलते (2008)
3. बिखरती संवेदना (2014)
4. एहसास (2017)
अपने शिल्प में निपुण सुषमा जी में अथाह सृजनशीलता है।
अपनी सिद्ध लेखनी से सुषमा जी जीवन के अनछुए पहलुओं पर लिखती रही हैं और लघु कथा विधा को और अधिक समृद्धशाली कर रही हैं लेखिका और उनके लेखन, शिक्षा और सम्मान के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें |
आदरणीय सुषमा सिन्हा जी का जन्म वर्ष 1962 में गया (बिहार) में हुआ इनकी माता जी प्रधानाध्यापिका थी इन्होने बीए ऑनर्स (हिंदी), डी. सी. एच., इग्नू (वाराणसी) उर्दू डिप्लोमा में शिक्षा प्राप्त की|
इनकी प्रकाशित पुस्तकें निम्नलिखित हैं :-
चार लघुकथा संग्रह
1. औरत (2004)
2. राह चलते (2008)
3. बिखरती संवेदना (2014)
4. एहसास (2017)
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में विगत 32 वर्षों से कविता, लघु कथा, कहानी आदि प्रकाशित ।
सम्मान पुरस्कार
सामाजिक संस्था "जागरूक जनता ट्रस्ट" द्वारा "जागरूक महिला पुरस्कार"।
साहित्यिक संस्था "मंजिल ग्रुप" दिल्ली, द्वारा "लाल बहादुर शास्त्री" सम्मान।
"शतकवीर सम्मान", "साहित्य योद्धा सम्मान", "मातोश्री सम्मान" एवं अन्य "साहित्यिक सम्मान" से सम्मानित।
"साहित्य सृजन मंच" खगड़िया (बिहार) द्वारा 2022 "लघुकथा गौरव" सम्मान एवं "सृजन गौरव सम्मान"।
"हरिवंश राय बच्चन स्मृति पर्व" पर "लघु कथा सम्मान"।
विभिन्न आध्यात्मिक एवं स्लोगन प्रतियोगिता में पुरस्कृत।
2017 में 29 वाँ "लघु कथा सम्मेलन" पटना बिहार में, गोवा की तत्कालीन राज्यपाल, श्रीमती मृदुला सिन्हा द्वारा, "लघु कथा सम्मान" से सम्मानित।
वर्तमान- स्वतंत्र लेखन।
ईमेल- ssinhavns@gmail.com
प्रो० राम मोहन पाठक जी द्वारा प्राप्त शुभाशंसा में प्रोफेसर साहब लिखते हैं कि
जीवन की अनुभूतियों के शब्दमंथन की परिणति रचना-'कथा-कहानी' प्रेरक, पठनीय पुस्तक है। लेखिका का कथन है- 'मैं सफर में आने वाले मील के पत्थर के साथ-साथ छोटे, बड़े कंकड़, पत्थर, विशाल वृक्ष, लताएँ-सभी को सहेजने की कोशिश करती हूँ, जो बाद में लेखनी में कब, कैसे बंध जाती हैं, पता नहीं चलता।'- यह कथन प्रस्तुत संग्रह की कथाओं में स्पष्ट ध्वनित होता है। पाठक को इन रचनाओं में आधुनिक जीवन की संगतियों-विसंगतियों और प्रस्तुत समस्याओं का कथारूप भी स्पष्ट झलकता है। साथ ही, समस्याओं के हल भी प्रस्तुत करने की लेखकीय चेष्टा इस संग्रह की विशिष्टता है।
काशी के साहित्यिक परिवेश में स्वतंत्र लेखन के लिए दीर्घ अवधि से समर्पित सुषमा जी के पूर्व प्रकाशित चार लघुकथा संग्रहों के कम में यह पांचवीं कृति है। संग्रह की कथाएँ प्रेरक और जीवनोपयोगी भी हैं।
लेखिका की मानव जीवन और समाज के प्रति विश्लेषणात्मक साहित्यिक दृष्टि पुस्तक की आत्मा है। आशा है साहित्यानुरागी पाठकों के लिए सकारात्मक चिंतन और जीवन की दार्शनिक दृष्टि प्रदान करता यह रचना-संग्रह अवश्य ही स्वीकार्य, रूचिकर एवं प्रेरक होगा!
साहित्य साधना की निरंतरता वस्तुतः तपस्या भी है। लेखिका की सार्थक, अनवरत साधना--तपस्या का यह क्रम जारी रहे, इसी शुभकामना के साथ......!
साथ ही जाना माना नाम श्री कृष्ण कुमार श्रीवास्तव (निर्देशक एवं लेखक) लेखिका के बारे में लिखते हैं कि
" दिनकर की कुछ पंक्तियां उद्धृत कर रहा हूं... बूढ़े बैल की पीठ पर बेरहमी से बेंत मत मारो। मेरी पीठ पर उसका निशान उगता है....।
इस एहसास की पराकाष्ठा जब लेखनी के माध्यम से कम शब्दों में अभिव्यक्त होकर पाठक की चेतना को जागृत करती है तो लघुकथा बन जाती
है। लघु कथा अर्थात् लघु है जो कथा।
लघु कथा का संक्षिप्त होना अनिवार्य माना जाता है, परन्तु संक्षिप्त होते हुए भी इसमें कथ्य, पात्र, चरित्र-चित्रण, संवाद और उद्देश्य निहित होते हैं।
लघु कथा लघु होने के बावजूद अपने उद्देश्य को बिजली की कौंध की तरह अपने पाठक के समक्ष अभिव्यक्त करने का सामर्थ्य रखती है।
लघु कथा, किसी क्षण विशेष में उत्पन्न भाव, घटना या विचार को संक्षिप्त रूप में सरल शब्दों से गढ़ी गई प्रभावी अभिव्यक्ति है। इसमें यथार्थ के
साथ-साथ कल्पना की उन्मुक्त उड़ान भी होती है। वर्तमान में साहित्यिक विधाओं की दौड़ में लघु कथा सबसे आगे है।
जहाँ तक मुझे ज्ञात है लघु कथा के बीज वेद-उपनिषिद् से लेकर पुराण, रामायण, महाभारत, बौद्ध-जातक कथाओं, पंचतंत्र, हितोपदेश आदि में
संस्थित हैं। भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखित अंगहीन धनी, अद्भुत संवाद और माधवराव सप्रे द्वारा लिखित "एक टोकरी भर मिट्टी" से लेकर सआदत हसन
मंटो, रमेश बत्रा, जगदीश कश्यप, सतीश दुबे, सतीश राज पुष्करण, कृष्ण कमलेश, विक्रम सोनी, विष्णु प्रभाकर, पृथ्वीराज अरोड़ा, मधुदीप, मधुकांत,
डॉ. शील कौशिक, हरिशंकर परसाई, प्रथम महिला लघु कथा लेखिका इंदिरा स्वप्न, चित्रा मृदुल, शकुंतला किरण, डॉ. चंद्रा सायता से होती हुई लघु कथा
की जो विशाल शोभायात्रा चल रही है उसमें सुषमा सिन्हा भी अपनी एक प्रमुख पहचान रखती हैं।
लघु कथा का कलेवर उसकी लघुता में ही होता है इसलिए लघु कथा के लेखक में अधिक सृजनशीलता होती है, क्योंकि उसे सीमित शब्दों में ही
अपनी संवेदनाओं को व्यक्त करना पड़ता है और अपने पाठकों को संतुष्ट एवं प्रभावित करना पड़ता है।
अपने शिल्प में निपुण सुषमा जी में अथाह सृजनशीलता है। इसी
कारण औरत, राह चलते, बिखरी संवेदना और एहसास के बाद इनका पांचवा
लघु कथा संग्रह प्रकाशित होने जा रहा है। इनके पूर्व प्रकाशित रचनाओं के
आधार पर यह स्पष्ट है कि तमाम सम्मानों से सम्मानित सुषमा जी की लेखनी
लघु कथा रचना शिल्प में सिद्ध हो चुकी है। अपनी सिद्ध लेखनी से सुषमा जी
जीवन के अनछुए पहलुओं पर लिखती रहें और लघु कथा विधा को और
अधिक समृद्धशाली करती रहें।
.."हमारे जीवन में घटने वाली छोटी-सी घटना में जीवन की
विराट व्याख्या छिपी रहती है। इस विराट कथ्य को बिम्बों में बांध लेना ही
लघु कथा है....."
"सुषमा जी" के लिए अनंत शुभकामनाओं के साथ....
अपने मन में खुशियों के दीप जलाये रखिये,
आपकी मुस्कान है बहुत अनमोल इसे अपने होठों पर बनाए रखिए।
- सौम्या गुप्ता
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
सौम्या गुप्ता जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
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शुभकामनाएं
अपने पराए के नाम पर मरने-मारने वाले.... बहादुर है और बिना अपना हित-अहित देखे सच का समर्थन करने वाले... बेवकूफ... फिर लोग कहते हैं कि दुनिया में इतनी तकलीफ क्यों है....गरीब और गरीब क्यों होता जा रहा और अमीर और अमीर क्यों होता जा रहा !
- लवकुश कुमार
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शुभकामनाएं
ऊपर की कमाई से कोठियां खड़ी करने वाला रिश्तेदार समझदार और काबिल, एक नंबर की कमाई से जीवन जीने वाला भोला और कमज़ोर फिर लोग कहते हैं कि अंधे के हाथ बटेर कैसे लग गई !
- लवकुश कुमार
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