समर्पण गलत नहीं होता
पर सच है यह कि,
यह भाव सबके लिए
लाना भी नहीं होता।
हो समर्पण सत्य के प्रति
सत्यवादी तुम बनोगे,
हो समर्पण कृष्ण के प्रति
तो कृष्ण जैसे तुम बनोगे।
तुम बनोगे कंस या कृष्ण
यह भी होगा इसी से निश्चित,
कि समर्पण किसके प्रति है?
कर्ण भी तो था समर्पित
पर समर्पण असत्य के प्रति,
दानवीर था वो ऐसा कि
जैसा न कोई और जगत् में,
कुरु वंश भी ठना हुआ था
पर ठना था अन्याय के प्रति,
नारायणी सेना थी पाई
फिर भी हारे महाभारत में,
आज भी वो निंदनीय हैं
क्योंकि वो थे समर्पित गलत के प्रति।
हनुमान का भी था समर्पण
पर समर्पण राम के प्रति,
अर्जुन भी तो था समर्पित
पर समर्पण कृष्ण के प्रति,
दोनों की होती प्रशंसा
दोनों ही हैं पूजनीय,
क्योंकि ये थे समर्पित सत्य के प्रति
कोई पूजनीय होगा
या कि होगी सिर्फ निंदा,
इसका निर्धारण होगा इससे
कि समर्पण है उनका किसके प्रति।
- सौम्या गुप्ता
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
सौम्या जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो kumarchetnapsw@gmail.com पर ईमेल कर दें
फीडबैक / प्रतिक्रिया या फिर आपकी राय, के लिए यहाँ क्लिक करें |
शुभकामनाएं