अस्मिता - हेलो भैया, राधे राधे 🙏🙏
भैया, कैसे हैं आप?
लवकुश कुमार: राधे राधे बिटिया, मैं ठीक हूँ।
आप कैसी हैं?
अस्मिता- भैया, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है। मेरा एक एग्जाम छूट गया। 😔🙏
और दूसरा पेपर हुआ, बस एक, उसमें भी 40 प्रश्न ठीक हैं, मैं चेक करके आई हूँ।
मैं भी ठीक हूँ भैया।
लवकुश कुमार: एग्जाम कैसे मिस हुआ?
अस्मिता- अब प्रैक्टिकल में 65 या 70 नंबर होने चाहिए, तब क्लियर होगा।
लवकुश कुमार: ओ लेवल के लिए शायद आपने थोड़ा जल्दी कर दी। आपको पहले कोई आसान कोर्स करना चाहिए था। लैपटॉप लेकर प्रैक्टिस करनी चाहिए थी।
अस्मिता - भैया, रिपोर्टिंग टाइम बहुत नीचे लिखा था। मुझे नहीं पता था। एक घंटे पहले ही गेट बंद हो गया। 9 बजे ही, जबकि एग्जाम 10 बजे से था।
मैं 9:30 पर पहुँची वहाँ।
लवकुश कुमार: परेशान नहीं होते बिटिया, जो भी होगा देखा जाएगा।
अस्मिता- हाँ भैया, आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं।
लवकुश कुमार: लिमिटेड टाइम में जितना हो सकता है करो, फिर जो होगा देखा जाएगा।
चिंता नहीं करते 🤝🤝🤝
अस्मिता -: भैया, प्रैक्टिकल में समय लगता है।
लवकुश कुमार: मैं सोच रहा था बिटिया, समय ज्यादा लगेगा। कोई बात नहीं, ग्रेजुएशन पूरा होते-होते हो जाए, तब भी कोई दिक्कत नहीं।
फिर से दे देना एग्जाम, फिर से भर देना फॉर्म, नो इश्यू।
जीवन में सब कुछ अपने सोचे हुए अनुसार नहीं चलता।
अस्मिता - मेरा एग्जाम छूटा, इतनी रिक्वेस्ट करने पर भी जाने नहीं दिया भैया। 😔, और मेरे जैसे 50 से ज्यादा बच्चे थे, इतनी दूर-दूर से गए थे।
लवकुश कुमार: रिक्वेस्ट बड़े अधिकारी अप्रूव कर पाते हैं। सिक्योरिटी गार्ड के पास इतनी शक्ति नहीं होती। वे लोग अपने बॉस और ऊपर वालों के कहे अनुसार कार्य करते हैं।
इसलिए रिक्वेस्ट करना भी केवल सक्षम अधिकारी से ही फलदायी होता है और दूसरा की कुछ नियम सारे केन्द्रों के लिए एक जैसे होते हैं जैसी की गेट एक नियत समय पर बंद करने का निर्देश मानक संचालन प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है|
कहीं भी एग्जाम देने जाना हो तो रिपोर्टिंग टाइम से डेढ़ घंटे पहले पहुँचने का लक्ष्य लेकर चलो, यदि लोकल में है और यदि दूसरे शहर में है तो यदि संभव हो तो रात्रि विश्राम परीक्षा केंद्र के नजदीक रखो अन्यथा रास्ते की लंबाई के अनुसार अतिरिक्त समय लेकर चलो ताकि कुछ समय के लिए ट्रेफिक जैम मे फंस जाने पर भी केंद्र पर ससमय पहुंचा जा सके|
लवकुश कुमार: अच्छे से सीख लो, फिर देना एग्जाम। कोई बात नहीं बिटिया।
अस्मिता - हाँ भैया, अब आगे से यही करूँगी। अब दोबारा ऐसी गलती कभी नहीं होगी, मैं एडीएम से भी बात की भैया, पर नहीं हुआ।
लवकुश कुमार: कोई बात नहीं बिटिया।
कोई भी अवसर आख़िरी नहीं होता (जीवन में बेहतर करके एक आत्मनिर्भर और लोकोपयोगी जीवन जीने के लिए )
ये मत सोचो कि अब क्या होगा।
हो सकता है कि अब और बेहतर हो|
एक बात याद रखो कि "बहादुर लोग किसी नुकसान पर परेशान नहीं होते, बल्कि उसे स्वीकार करते हैं और भविष्य के लिए अतीत से सीखते हुये आगे बढ़ते हैं|"
अस्मिता - हाँ भैया, ये बात तो है।
अस्मिता - इतनी लंबी-लंबी कोडिंग होती है। बस 30 या 35 मिनट में दो प्रश्न करने होते हैं भैया।
लवकुश कुमार - कोडिंग के लिए यशवंत कानेटकर की पुस्तक मांगा सकती हो, मैंने इसी से प्रोग्रामिंग सीखी थी।
अस्मिता - हाँ भैया, किताब मँगा लेती हूँ। 🙏
एक ओ लेवल ही ऐसा विषय है जिसमें मुझे निराशा मिलती है भैया। समझ नहीं आता क्या करूँ। 🙏
लवकुश कुमार: ओ लेवल को आराम से करो, जीवन का संतुलन बनाए रखते हुए। कोई जल्दबाज़ी नहीं, लैपटाप लेलों और अभ्यास करो, यह सब अभ्यास के विषय हैं, किसी को कम तो किसी को ज्यादा समय लगता है लेकिन बारीकी से ध्यान देने से हो जाता है, अच्छी किताब और अच्छा शिक्षक|
अस्मिता - ओके भैया। 🙏🙏
मैं प्रैक्टिकल देती हूँ भैया। जो होगा, रिज़ल्ट आने पर पता चल जाएगा।
पर शायद भैया, न देकर मन में यह नहीं रखना चाहती कि कहीं ऐसा न लगे कि दिया होता तो हो जाता, क्या पता। 🙏🙏
लवकुश कुमार: ओके बिटिया, अच्छा। ख्याल रखो, प्रयोगात्मक परीक्षा दे आना, कुछ सीखने और समझने को मिलेगा। धीरे-धीरे सब अच्छा होगा, फिर बात होगी बिटिया।
एक काम से जा रहा हूँ
रिज़ल्ट से जुड़कर काम मत करो।
सीखने के लिए काम करो।
अस्मिता - ओके भैया। 🙏🙏