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मैं अपने वाट्सैप स्टेटस पर अमूमन उक्तियां ही क्यों लगाता हूं ? एक प्रयास

लोगों के मनमाने व्यवहार और असीमित उपभोग की आकांक्षाओं ने धरती और सभ्यता को संकट में डाल दिया है - ग्लोबल वार्मिंग, बिखरते रिश्ते, तनाव, बेरोजगारी और असुरक्षा की भावना, सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह के चलते समाज से रिकग्निशन पाने की गैर जरूरी हद तक कामना इत्यादि।

 

जब अमूमन वाट्सैप स्टेटस पर पर्यटन के फोटोज या सतही ज्ञान के वीडियो/फोटो दिख रहे हों उस बीच " जीवन, मानव मन और दुनिया की बारिकियों या फिर इंसान की विरोधाभासों से भरी जिंदगी पर एक नजर डालने का इशारा है। "

 

हो सकता है कि २५० लोगों में ऐसे भी लोग हों जो स्टेटस में लेख या उक्ति देख बिना पढ़े आगे बढ़ा देते हों

कुछ ऐसे होंगे जो सहमत न होते होंगे और इन्हें किताबी बातें बोलकर चिढ़ जाते हों

कुछ ऐसे होंगे जो आंशिक रूप से सहमत होते होंगे

 

कुछ तो इन्हें जीवन में उतारते होंगे

 

कुछ के दिमाग के किसी कोने में पड़ जाते होंगे, ताकि वक्त जरूरत स्पष्टता में काम आयें

 

कुछ के जीवन में चल रहे झंझावातों और उलझनों का समाधान मिल जाता होगा

 

कुछ तो मेरे स्टेटस को रिपोस्ट करते हैं अपनी वाल पर

या वो खुद भी उक्तियों को स्टेटस में लगाना आदत में ले आते हैं।

 

मेरी कल्पना में है वो एक दिन जब आपकी कांटैक्ट लिस्ट के कई लोगों के वाट्सैप स्टेटस में होंगी ऐसी पंक्तियां जो हमारी समस्या का हल हो सकती हैं

या हमें हमारी मानसिक गुलामी का एहसास करा सकती हैं

या हमें हमारे जीवन के झूठ को आयने में दिखा सकने की क्षमता रखती होंगी

या फिर वो हमारे जीवन और समाज की असली और केंद्रीय समस्या की तरफ हमारा ध्यान खींच सकती हैं 

या वो हमें ये अहसास दिला सकती हैं कि हमें कोई अधिकार नहीं अपनी आराम और विलासिता के लिए, समाज और वातावरण को खतरे में डालने का

या वो लोगों, स्वयं और दुनिया को लेकर हमारे भ्रम को तोड़ हमें तनाव और दबाव से मुक्त कर सकती हैं।

 

अगर आप भी किसी बिंदु से सहमत हैं तो उठाइए एक कदम खुद की और उस माहौल और उस हवा को बेहतर करने को जिसमें हम सांस लेते हैं।

 

जब हमारे कार्य के पीछे जनहित होता है फिर हमें ये न सोचना चाहिए कि लोग ( संकीर्ण समझ के लोग) हमारे बारे में क्या सोचते हैं।

 

शुभकामनाएं

- लवकुश कुमार

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सलाम क्यों और किसे ?
  • सलाम पाने के लालच में सलाम न करें।
  • सलाम उसे करें जो सच के समर्थन में खड़ा हो और दूसरों की तकलीफ़ समझने का प्रयास करता हो।
  • अपमान नहीं करना है किसी का लेकिन सलाम भी नहीं करना हर किसी को ‌।

 

 

 

 

 

 

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ड्राइवर का खाना - एक लघुकथा

एक सरकारी कार्यालय का दृश्य, कर्मचारी अपने अपने काम में लगे हैं।

 

धीमी आवाज में, पदासीन अधिकारी हरीश जी के फोन पर रिंगटोन बजती है, " नाम गुम जायेगा, चेहरा ये बदल जाएगा "

 

हैलो, सामने से आवाज आती है 

 

 

हैलो सचेत भाई कैसे हो, और कैसी चल रही है पहाड़ की यात्रा, हरीश जी पूछते हैं ।

 

बढ़िया चल रही है हरीश भाई, एक बात बताओ यार ये ड्राइवर को खाना खिलाने की बात हुई थी क्या, ये तो तीनों डाइट क्लेम कर रहा है जबकि मैंने तो ब्रेकफास्ट भी कराया और २०० रुपये भी दिए, सचेत निश्चिंत होना चाहते हैं, हरीश भाई, ऐसी कोई बात हुई थी क्या, अगर हुई है तो मैं दे देता हूं पैसे।

 

सचेत, हरीश के मित्र हैं और उत्तर भारत के पर्वतों की सैर के लिए ४ दिन के दौरे पर हैं, क्योंकि हरीश इसी पर्वतीय राज्य में केंद्रीय सेवा में हैं अतः दौरे की व्यवस्था इनके हांथ में और खर्चा दोस्त के हांथ में है ।

 

यथा नाम तथा गुण

 

सचेत, सचेत हैं कि जब बात नहीं हुई तो पैसे क्यों दें और हरीश, हरीश निकले कि जब बात केवल १००-२०० की हुई थी तो ज्यादा खर्चे के लिए अपने दोस्त को बोलें तो कैसे बोलें हालांकि वो चाहते थे कि ड्राइवर को खाने के लिए उचित भुगतान कर दिया जाए, क्योंकि कम दिहाड़ी में पहाड़ का अपेक्षाकृत महंगा खाना, ड्राइवर की जेब ही खाली कर सकता है।

 

क्योंकि बात १००-२०० की ही हुई थी इसीलिए हरीश ने सचेत से कह दिया कि वह सारी डाइट्स का भुगतान करने को बाध्य नहीं।

 

बात आई गई हो गयी हो गई लेकिन हरीश के संवेदनशील मन में विचार और सवाल आने लगे कि जब ड्राइवर को खाना, पार्टी ही खिलाती है तो उसने पहले क्यों नहीं कहा खुलकर, कहा भी तो गाड़ी मालिक ने १००-२०० की बात कही, और फिर झूठ क्यों बोला कि बात हुई है?

एक और बात कौंध गई कि ड्राइवर द्वारा खाने के लिए बोले गए झूठ को तो पकड़ लिया लेकिन उन आनलाइन शापिंग कंपनीज के झूठ का क्या जो १२०० की कीमत की चीज की कीमत को २५०० लिखकर उसे ४०% छूट के साथ १५०० का बेंच देती हैं?

क्या हम इस संगठित झूठ का विरोध कर पाते हैं?

 

 

- लवकुश कुमार

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सुकून के पल और सृजन

कल रात 10:30 के आस पास, 90's का एक गाना कई बार सुना (हैडफ़ोन लगाकर बिना किसी को डिस्टर्ब किये ), संगीत बड़ा अच्छा लगा, मनमोहक, किसी काम को जल्दी पूरा करने का दबाव न था, सुकून में था मन, और रचना हुयी एक लघुकथा (जो कुछ वक़्त समीक्षा में रहने के बाद वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी ) की और साथ ही कई पुरानी घटनाओं को शांत मन से याद कर पाया और उन पर लघुकथा की रचना के लिए शीर्षक लिखे (संख्या में 8), ये महत्ता होती है शांति की, सुकून की |

" दुनिया में सृजन और अन्वेषण के अनेक कार्य शून्य के क्षणों में ही हुए हैं | "

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'तृषित' : एक जीवन यात्रा- पुस्तक परिचय

डॉ॰ प्रीति अग्रवाल द्वारा लिखित यह प्यारी सी पुस्तक, आदरणीय डॉ॰ विजय अग्रवाल सर के जीवन, संघर्ष, कार्यों और अनुभवों पर आधारित है, प्रकाशक बेनतेन बुक्स के शब्दों मे - " यह एक पिछड़े छोटे से गांव में निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे डॉ. विजय अग्रवाल के जीवन की सच्ची कहानी है। यह उस किसी भी ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जो अपनी विपरीत परिस्थितियों से हार मानने से इंकार करके अपनी ज़िन्दगी में निरंतर अग्रसर होता जाता है। इसको पढ़ते समय इसमें आपको कई जगह अपनी झलक दिखाई दे सकती है। इस पुस्तक मे आपकी मुलाक़ात केवल घटनाओं से ही नहीं होगी बल्कि उन घटनाओं को जन्म एवं स्वरूप देने वाले जीवन के सूत्रों से भी होगी | 'तृषित' यानि प्यासा | यह आपके लिए  ' जीवन के जलकुंड '  का भी काम कर सकती है, आपके जीवन से जुड़े कुछ प्रश्नो के उत्तर देकर   "


मैंने क्या बेहतरी महसूस की इस पुस्तक को पढ़कर:

  • अपने आदरणीय डॉ॰ विजय अग्रवाल सर के शुरुआती जीवन को जानने का मौका मिला जहां से चलकर वह ऐसे इंसान बने जिन्होने अपने छात्र प्रेम और देश प्रेम के चलते युवाओं को संबोधित कर कई किताबें लिखी जिनके केंद्र मे, युवाओं के जीवन मे संवेदनशीलता, तार्किकता, कर्मठता, साहस, स्पष्टता और समझ को उचित स्थान देना रहा, सिविल सेवा परीक्षा मे सफलता के साथ-साथ डॉ॰ साहब की किताबें पाठकों को एक संयत, संतुलित, शांतिमय और सफल जीवन जीने के सूत्र प्रदान करती हैं |
  • ये जानने और समझने का अवसर मिला कि एक विनम्र पृष्ठभूमि से आने वाला एक आम युवक जिसने बचपन मे ही अपने पिता को खो दिया हो, कैसे देश की प्रतिष्ठित सेवाओं मे जगह बनाई और समाज मे चल रही दहेज पृथा जैसी कई बुराइयों को टक्कर देते हुये आगे बढ़ा और अपने काम और कौशल के दम पर लोगों के दिलों मे जगह बनाई | इनके वृत्तान्त से स्पष्टता और साहस दोनों मिलते हैं |
  •  साहित्य मे, अग्रवाल साहब का एक विशेष नाम है, उनकी यहाँ तक की यात्रा और विकास की झलक मिली और एक रास्ता भी अपनी साहित्यिक यात्रा को आगे बढ़ाने का |
  • ये जाना कि कैसे आप अपने काम के प्रति समर्पण और दूसरों के सहयोग को उचित मान देकर आप दूसरों का, अफ्नो का अनवरत सहयोग हासिल कर सकते हैं |
  • ये जाना कि एक लेखक और समाजसेवी के जीवन मे सहयोगी पत्नी का कितना अहम योगदान होता है |
  • ये जाना कि कैसे आप अपने बड़ों के स्नेह का पात्र बन सकते हैं | 
  • ये जानने का अवसर मिला कि आज जो AFEIAS.COM द्वारा, सिविल सेवा परीक्षा के साथ साथ जीवन प्रबंधन पर तार्किक सामग्री और नियमित सम्बोधन का जो अनवरत सिलसिला चलाया जा रहा है वो कैसे शुरू हुआ, ये समझ मेरे जीवन मे उपयोगी साबित होगी ऐसा मेरा विश्वास है |

 

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय डॉ॰ प्रीति अग्रवाल को कि उन्होने इस पुस्तक को लिखकर हमारे जैसे युवाओं को अपने अजीज डॉ॰ विजय अग्रवाल सर को और बेहतर तरीके से जानने समझने का मौका दिया |

 

मुझे पूरा विश्वास है कि पाठक इस पुस्तक को पढ़कर  बहुत कुछ बेहतरी की तरफ बढ़ सकते हैं फिर चाहे वो जीवन का मामला हो या प्रातियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मामला हो |

शुभकामनायें

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भौतिकी के सैद्धांतिक /आंकिक प्रश्नों (theoratical/Numerical Questions) के लिए मददगार कुछ महत्वपूर्ण बिंदु - भाग -2
  1. जैसा कि हम जानते हैं कि पवन की दिशा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर होती है, अर्थात उच्च दाब की ओर से हवा निम्न दाब की ओर धकेलती है। साथ ही हम यह भी जानते हैं कि बरनोली प्रमेय के अनुसार जिस तरफ पवन की गति तेज होगी उधर हवा की दाब उर्जा कम हो जाएगी परिणाम ये होता है की आंधी में किसी घर पर पड़ी हुयी टीन की चादर के ऊपर तेज पवन के चलते हवा का दाब कम रहता है जबकि चादर के नीचे स्थिर हवा के चलते ज्यादा वायु दाब जोकि बाहर की तरफ दबाव डालता है और चादर उड़ जाती है, कंक्रीट की छत नहीं उडती क्योंकि मजबूती से जुड़ी होती है और भारी होने के चलते हवा का दबाव इसके भार को संतुलित नहीं कर पाता |
  2. डिग्री ऑफ़ फ्रीडम एक विमाहीन संख्या होती है |
  3. अगर किसी प्रश्न में दिया हुआ है कि एक ही धातु की दो अलग अलग छड़ें तो तुरंत लिखिए Y1  =  Y2; माने दोनों का यंग प्रत्यास्थता गुणांक एकसमान होगा, 1 और 2, दो अलग अलग परिस्थतियों को दिखाता है |
  4. द्रव के अन्दर मुक्त प्रष्ठ से h गहरे नीचे कुल दाब = वायुमंडलीय दाब + द्रव स्तम्भ का दाब = P0  + dgh
  5. समान्तर क्रम में जुड़ी स्प्रिंग के लिए बल नियतांक k = k1  +  k2 मतलब उतने ही भार के लिए अब कम खिंचाव कम उत्पन्न होगा क्योकि खिंचाव   x  = Weight / k 
  6. सरल आवर्त गति में पथ के सिरे(अंतिम बिंदु ) पर कण को क्षणिक रूप से रूककर वापस आना होता है इसीलिए उसका वेग क्षणिक रूप से शून्य होकर माध्य स्थिति की ओर बढ़ता है और तब तक बढ़ता रहता है जब तक की वह माध्य  स्थिति में न पहुँच जाये क्योंकि प्रत्यानयन बल भी तो उसे माध्य स्थिति में ही लाना चाहता है अतः हम कह सकते हैं कि माध्य स्तिथि में वेग अधिकतम और त्वरण शून्य होता है ; फिर जड़त्व के कारण कण माध्य स्थिति के दूसरी तरफ चला जाता है परिणामतः प्रत्यानयन बल को पुनः सक्रिय होना पड़ता है ताकि वो कण को पुनः माध्य स्थिति में ला सके अतः ये अब कण की गति का विरोध करता है और उसके वेग को घटाने लगता है नतीजा ये होता है की पथ के दूसरे छोर तक पहुँचते ही इसकी गति शून्य होकर यह पुनः माध्य स्थिति की ओर चल देता है | छोर पर वेग शून्य तथा त्वरण अधिकतम होता है |
  7. बिंदु -6 के हिसाब से छोर पर गतिज उर्जा शून्य हो जाती है परिणामतः स्थितिज उर्जा अधिकतम |
  8. जितना ही कोई तार तना हुआ होगा उतना ही उसमे कम्पन आसान होगा माने समान भार के लिए एक ज्यादा तनाव वाले तार में कम्पन ज्यादा होने से ध्वनि की गति ज्यादा होगी |
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भौतिकी के सैद्धांतिक /आंकिक प्रश्नों (theoratical/Numerical Questions) के लिए मददगार कुछ महत्वपूर्ण बिंदु - भाग -1
  1. वो राशियाँ (quantities) जो दो समान (similar) राशियों का अनुपात (ratio) होती हैं वो विमाहीन (dimensionless) होती हैं; जैसे अपवर्तनांक (refractive index), सापेक्षिक आर्द्रता (relative density), विकृति (strain),कोण(angle) इत्यादि |
  2. राशि और राशि में परिवर्तन या फिर राशि का औसत मान सबकी विमा एकसमान होती है; जैसे वेग हो या वेग परिवर्तन या फिर हो औसत वेग सबकी विमा और मात्रक समान ही रहेंगे|
  3. कन्वर्शन याद रखें जैसे की SI unit (एसआई मात्रक ) में उर्जा का मात्रक जूल होता है और सवाल में दिया है कैलोरी तो तुरंत उसे जूल में परिवर्तित कर लें; 1कैलोरी = 4.18 joule, आसान करने के लिए 1 कैलोरी = 4.2 joule
  4. शब्दों के रूप में दी गयी शर्तों को अंकों और नोटेशन में लिखने से सूत्र का निर्धारण और इस्तेमाल आसान हो जाता है जैसे की अगर दिया है की एकसमान रेखीय गति तो तुरंत a=0 लिख दीजिये माने त्वरण (acceleration) जीरो है, अगर दिया है की वस्तु विराम से चलना शुरू कर रही तो  तुरंत u=0 लिखिए माने प्रारंभिक वेग(initial velocity) जीरो है; या फिर अगर दिया है की वस्तु रुक गयी है तो तुरंत v=0 लिखिए माने अंतिम वेग (final velocity) जीरो है, और भी ऐसे ही निर्धारण किये जा सकते हैं |
  5. जैसा की हम जानते हैं कि वेग = विस्थापन / समय अंतराल अतः विस्थापन = समय अंतराल * वेग जिससे ये कह सकते हैं कि वेग- समय ग्राफ का क्षेत्रफल हमें विस्थापन का मान देगा|
  6. केस (CASE) बनाकर हल करें प्रश्न:- जैसे किसी प्रश्न में अगर एक तार की लम्बाई और अनुप्रस्थ क्षेत्रफल क्रमशः l और A है तथा प्रतिरोध R है और उसी पदार्थ के दूसरे तार के लम्बाई और अनुप्रस्थ क्षेत्रफल क्रमशः 2l और 4A है तो दूसरे तार का प्रतिरोध का मान, R के गुणक के रूप में निकालने के लिए बस दोनों cases में अलग अलग व्यंजक निकालो प्रतिरोध के लिए और उन्हें एक दूसरे से भाग देकर अभीष्ट उत्तर तक पहुँच सकते हैं; यही case बनाकर डिवाइड करने की प्रक्रिया अन्य चैप्टर्स और अन्य सूत्रों के लिए भी की जा सकती है |
  7. जिस तरह समान्तर क्रम में जुड़े प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवान्तर एकसमान होता है वैसे है समान्तर क्रम में जुड़ी दो या अधिक छड़ों के सिरों के बीच तापमान का अंतर भी एकसमान होता है |
  8. किसी वस्तु के तापमान में 1000 डिग्री सेंटीग्रेड की बढ़ोत्तरी करो या 1000 केल्विन की दोनों परिस्थितियों में तापमान के बदलाव का मान एकसमान (1000) है |
  9. जिस तरह तापमान बढ़ने पर उर्जा बढ़ जाती है और वेवलेंथ घट जाती है वैसे ही वीन्स लॉ में तापमान बढ़ाने पर अधिकतम तीव्रता वाली वेवलेंथ भी घट जाती है |
  10. fractional change की गणना, शुरुआती मान के सापेक्ष ही करते हैं माने बदलाव को मूल मान से भाग देते हैं, जैसे कि विकृति भी एक fractional change है; रेखीय विकृति  (l ~ l' )/l

जहाँ l, शुरुआती लम्बाई (मूल लम्बाई) है |   यहाँ " ~ " अंतर का प्रतीक है l या l' में जो भी ज्यादा होगा उससे कम वाले को घटा देंगे |

 

शुभकामनायें 

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पिता – एक लघुकथा

क्या हुआ विभू ? इतना परेशान क्यों लग रहा है ? मम्मी ने मुरझाया सा मुह लेकर बैठे अपने बेटे से पूंछा |

कुछ नहीं मम्मी, लग रहा है की मै जेईई की कोचिंग के लिए दिल्ली नहीं जा पाउँगा |

ऐसा क्यों कह रहे हो बेटा, पापा प्रयास कर रहे हैं न, फिर तुम्हे स्कालरशिप भी तो मिली है |

हाँ मम्मी स्कालरशिप तो मिली है फिर भी फीस काफी ज्यादा है, और आजकल तो पापा का काम भी बढ़िया नहीं चल रहा |

माँ, विभू के बाल सहलाती हुयी बोली, बेटा तेरी कोचिंग वाली बात तो तेरे पापा को तब से याद है जब तू 11th में ही था, आखिर

उनका भी तो सपना है की तुझे बेहतर से बेहतर शिक्षा मिले, भले ही हम तुझे बड़े स्कूल में न पढ़ा सके, लेकिन तेरी लगन देखकर

तेरे पापा कह रहे थे की एक साल की तो बात है करा देंगे कोचिंग | दरवाजे से पापा की आवाज आई, माँ दरवाजा खोलने गयी, पिता

ने अपनी जेब से बड़ी सावधानी से एक हरे रंग का नोट के आकर का कागज़ निकाला और बड़े गर्व से पत्नी के हाँथ में देते हुए बोले की

विभू की माँ विभू की तैयारी की व्यवस्था हो गयी है ! माँ समझ न पाई की ये कैसा कागज़ है, पापा ने बताया ये डीडी है विभू की कोचिंग

की फीस के लिए | महेश भाई साहब से बात हो गयी है, विभू पीतमपुरा में उनके घर ही रुककर तैयारी करेगा |

माँ पापा की बात सुन विभू ऐसे खुश हो गया जैसे उसे पंख लग आये हों अथाह आकाश में उड़ने को, बेटा पिता की

उपस्थिति में बहुत सुरक्षित महसूस कर रहा था |

पापा ने अपने काम में सहयोग के लिए एक पुरानी लोडर खरीदने के लिए जो पैसा जमा किया था

उसे निकाल अपने बेटे को बेहतर अवसर मुहैया कराने को खर्च कर दिया क्योकि वो अच्छे से समझते थे

की लोडर तो दो साल बाद भी आ जाएगी लेकिन विभू दो साल बाद जेईई में न बैठ पायेगा |

 

लवकुश कुमार

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सच बोलने वाले लोग कम क्यों दिखते हैं ? एक पड़ताल: भाग -1

आपसी रिश्तों को सन्दर्भ में लेते हुए, आएये गौर करते हैं कुछ बातों पर;

  1. अगर हमारा कोई साथी, सहकर्मी, दोस्त या रिश्तेदार हमसे किसी बात पर असहमत है तो क्या प्रतिक्रिया रहती है हमारी 

क्या हम उसके पॉइंट ऑफ़ व्यू (नजरिये) को समझने का प्रयत्न करते हैं और उससे जिज्ञासा व्यक्त करते हैं कि वो हमें अपनी बात और अच्छे से समझाए 

या फिर हम उससे बात बंद कर देते हैं क्योंकि हमारे अहम् को ठेस लग जाती है, या फिर खुद को सही साबित करने के लिए बिना उसकी बात को समझे हम उससे 

बदतमीजी के साथ कुतर्क करने लग जाते हैं, या फिर उसे खुद से नीचा दिखकर उसकी आवाज को दबाने का प्रयास करने लग जाते हैं;

अगर आप पहले विकल्प के अलवा कोई प्रतिक्रिया चुनते हैं तो आपने परोक्ष रूप से असहमति दर्ज करने को मुश्किल बनाने का काम किया है, संभावना है की आगे वो इंसान आपसे किसी मामले पर सहमत न होने पर असहमति व्यक्त करने से परहेज करेगा और यदि आपसे कोई स्वार्थ है तो झूठे ही आपकी हाँ में हाँ मिला लेने की संभावना बढ़ जाएगी

इस तरह दो नुक्सान हुए, पहला तो सामने वाले ने झूठ बोला और दूसरा की आप चूक गये एक और नजरिये से चीज़ों को देखने के और अपनी दृष्टि और समझ को और समावेशी बनाने से |

         2.  आपका किसी से कोई विवाद या कहा सुनी हो गयी और आप अपने किसी साथी के सामने उस इंसान (जिससे विवाद या कहा सुनी हुयी हो) की बुराई करने लगे और उसकी कमियों पर बोलने लगे, क्या हो अगर आपका साथी उस आदमी की गलतियों के साथ आपकी गलती और कमी पर भी बात करने लगे या आपके उस नजरिये को बदलने को कहने लगे जिसके चलते आपको अपने विरोधी का सही काम भी गलत लग रहा है; या फिर आपसे झगड़ने के बजाय सुलह  करने की बात बोलने लगे; क्या प्रतिक्रिया होगी आपकी ?

क्या हम  उसके पॉइंट ऑफ़ व्यू (नजरिये) को समझने का प्रयत्न करते हैं और उससे जिज्ञासा व्यक्त करते हैं कि वो हमें अपनी बात और अच्छे से समझाए 

या फिर हम  उससे बात बंद कर देते हैं क्योंकि हमारे अहम् को ठेस लग जाती है; कहीं ऐसा तो नहीं की हम उसे खुद से अलग या विपरीत पक्ष वाला मानने लग जाएँ  और इस कदर कि उसकी दिक्कत में भी उसके साथ खड़े होने से मन कर दें (दिक्कतें किसी के सामने भी आ सकती हैं, दिक्कत मे साथ देना तो मानव धर्म है )

अगर इस तरह का व्यवहार हुआ आपका फिर तो संभावना ये बन जाएगी की सामने वाला इंसान या तो आपसे दूरी बना लेगा (फिर आप कहोगे की सच बोलने वाले लोग कम हैं) या फिर आपके सामने आपकी हाँ में हाँ मिलाएगा और आपके विरोधी के सामने उसकी हाँ में हाँ मिलाएगा और नतीजा क्या होगा की दोनों की ग़लतफ़हमी बढती ही जाएगी और खुद की गलती हमें दिखाई ही न देगी | (अमूमन लोग ऐसा करते हैं ये सोंचकर की कहीं इनसे कोई काम न पड़ जाये ) आगे आप विचार कर सकते हैं ?

 

एक बात कहकर इस भाग को पूरा करूँगा कि लोग अपना टारगेट पहले ही फिक्स कर चुके होते हैं उसी हिसाब से तर्क चुनते हैं, उदाहरण के लिए ये जानते हुए भी की अमुक इंसान एक नंबर का भ्रष्ट इंसान है फिर भी कुछ लोग उससे रिश्ता जोड़ने को, उसे सम्मान देने को तैयार हो जाते है क्योंकि वो पैसे वाला है या रसूख वाला है क्योंकि उस वक़्त प्राथमिकता में (टारगेट ) पैसा या कोई विशेष काम होता है |

अगर प्राथमिकता में पैसा और भौतिक उपभोग रहेगा फिर क्यों लोग स्पष्टवादी होंगे लोग तो फिर पैसे के पीछे भागेंगे और उसके लिए नैतिक पतन से भी परहेज न करेंगे |

जिस तरह के लोगों को हमारे समाज में मान मिलेगा, उस तरफ को ही भावी पीढ़ी बढ़ेगी, अगर सच के रास्ते चलने वालों को नादान कहकर उनका मज़ाक उड़ाया जायेगा और साथ खड़े होने से मना कर दिया जायेगा तो फिर सच के रास्ते चलने वाले कम लोग ही बचेंगे |

जीवन में कुछ रोमांचक करना चाहते हैं तो सच को अपना समर्थन दें, सही काम के लिए सही तकलीफ चुनें|

 

चर्चा के लिए राय जरूर साझा करें - lovekush@kumarchetna.in

शुभकामनायें

-लवकुश कुमार  

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समाज की बेहतरी के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं ? एक विकल्प

कई रास्ते हो सकते हैं ऐसा करने के, कुछ आपने सोंचे/देखे होंगे 

एक रास्ते की बात मै करना चाहता हूँ, शायद आपको पसंद आ जाये:

एक संयत और ठसक वाला संतुलित जीवन जीकर आप एक आदर्श पेश कर सकते हो 

इससे क्या होगा ? इससे ये हो सकता है कि

  1. आपके जैसी ही इच्छा रखने वाले लोगों को एक रास्ता मिल जायेगा
  2. जब आप एक संयमित और संतुलित जीवन जियेंगे, कसरत, वित्तीय आत्मनिर्भरता और अध्यात्मिक अध्ययन जिसमे शामिल हो 

तो मानसिक शांति और उत्कृष्टता हांसिल होगी |

       3. ईमानदारी के साथ ठसक (बिना किसी अनुचित दबाव में आये ) वाला जीवन जीकर आप एक आदर्श जीवन की मिशाल बन सकते हैं 

आपको  और आपके जीवन की शांति को देख और लोग भी प्रेरित हो सकते हैं |

        4. जब आप अपने जीवन में ईमानदार होते हो माने कथनी और करनी में एक होते हो और अपने हर एक निर्णय के पीछे के केंद्र पर नज़र रखते हो तो उत्कृष्टता आती है जीवन में / कार्यों में जो दूसरों के लिए प्रेरणा बनती है |

इस तरह आपके काम में नए लोगों का साथ भी जुड़ सकता है और अगर लोगों का साथ मिलने में वक़्त भी लगा तो कम से कम आप एक प्रेरणादायक जीवन जी पाओगे और

इतनी संतुष्टि रहेगी की आपने किसी अव्यवस्था को बढ़ाने में सहयोग नहीं किया, बाकि संयोग होते चले गये और जरूरी कौशल विकसित होते गये तो कारवां आगे बढेगा लोग जुड़ते जायेंगे 

आखिरकार समाज के लिए काम करना है तो आगे बढ़ते रहेंगे जैसा समाज का साथ मिलेगा वैसी गति रहेगी, किसी भी हालत में एक बेहतर जीवन जीना है जिसका ध्येय उच्च मानक स्थापित करना हो, लोगों का साथ या पहचान मिले या न मिले, हाँ अपने काम को बड़े मंच पर लाकर हम इसे ज्यादा लोगों की नज़र में ला सकते हैं, इससे ज्यादा लोगों का साथ मिलने की गुंजाइश बन जाएगी |

यहाँ पर मै साहिर लुधियानवी साहब की कुछ पंक्तियाँ उद्धृत करना चाहूँगा :

माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके
कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम

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शुभकामनायें

-लवकुश कुमार  

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