Article

21वीं ऑनलाइन साप्ताहिक पुस्तक परिचर्चा 25-07-2026

कल शनिवार (25-07-2026) हम सबके सामूहिक प्रयास और वरिष्ठजनों के प्रोत्साहन से इकीसवीं साप्ताहिक पुस्तक परिचर्चा का ऑनलाइन आयोजन सफल रहा, जिसमें निम्नलिखित पुस्तकों पर सार्थक चर्चा हुयी:


मैडम सर – मंजरी जारूहार : बिहार की पहली महिला आई पी एस अधिकारी की आत्मकथा और संस्मरण, जीवन के संघर्षों और चुनौतियों को समझने का एक झरोखा 
प्रस्तावक – जीशान अंसारी जी 
तोतो चान – तेत्सुको कुरोयानागी : एक बच्ची की आत्मकथा के रूप में एक बेहतरीन और गैर परंपरागत जापानी विद्यालय की कहानी, प्राथमिक शिक्षा के शिक्षकों और माता-पिता के लिए एक बहुत जरूरी किताब|
प्रस्तावक – लवकुश कुमार
धुप्पल – भगवती चरण वर्मा : जाने माने साहित्यकार और चित्रलेखा सरीखे उपन्यास के रचयिता भगवती चरण वर्मा के जीवन के कुछ किस्से जिसमें उन्होने इस बात को रेखांकित करने का प्रयास किया है कि उनके जीवन की उपलब्धियां, मेल मिलाप उनकी लेखकीय क्षमता से ज्यादा इत्तेफाक और परिस्थितियों की दें हैं, एक पढे जाने योग्य बेबाकी से लिखी हुयी पुस्तक|
प्रस्तावक – लवकुश कुमार
कबीरा सोई पीर है- प्रतिभा कटियार : जातीय दंश और समाज में महिलाओं की स्थिति की धरातल की सच्चाई से रूबरू कराता एक बेहतरीन उपन्यास जिसमें बताया गया है कि जिस पर बीतती है वही जानता है कि क्या होता है जातिगत भेदभाव और क्यों एक औरत ही दूसरी औरत की आजादी को बांध देती है|  सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते कुछ युवाओं को लेकर लिखा गया एक बेहतरीन उपन्यास|
प्रस्तावक – लवकुश कुमार
अमृता इमरोज – उमा त्रिलोक : इस पुस्तक में अमृता जी का साक्षात्कार है, जिसमें उन्होने अपने और इमरोज जी के रिश्ते पर बात की है और बात की है कि क्यों उन्हे अपने रिश्ते को सामाजिक स्वीकृति की जरूरत महसूस नहीं और उन्होने शादी नहीं की, और भी बहुत कुछ जो पाठकों को स्पष्टता दे सकता है, संस्थाओं की सार्थकता पर|
प्रस्तावक – प्रिया कश्यप 
चेकमेट जिंदगी (जियो जी भर के) – प्रदीप “पंकज” : जीवन के संघर्षों, भावनात्मक पहलुओं, विविध रंगो और इसे बेहतरीन तरीके से जीने के फलसफ़ों के जानने के लिए जरूर पढ़ें या कविता संग्रह|
प्रस्तावक – आरती मैम
संघर्ष (अपने विरुद्ध) – आचार्य प्रशांत : दूसरों के विरुद्ध जाना हमेशा आसान होता है लेकिन अपने विरुद्ध जाना नहीं| जिस दिन हम अपने भीतर की लड़ाइयों को जीत लेंगे हम पाएंगे कि बाहर की लड़ाइयाँ आसान हो गयी हैं| ऐसी ही बहुत सारी स्पष्टता वाली बातों से परिचित होने के लिए जरूर पढ़ें यह पुस्तक|
प्रस्तावक – सौम्या मैम


उक्त परिचर्चा में निम्नलिखित पुस्तकसाथी शामिल रहे:
जीशान अंशारी जी, सौम्या मैम, शाश्वतम, प्रीति जायसवाल, आरती मैम, गायत्री जायसवाल,  प्रिया कश्यप, उर्मिला जायसवाल, पार्थ कुमार और लवकुश कुमार |


जिनके द्वारा निम्नलिखित बिन्दु/विषय/रचनाओं का रेखांकन किया गया:


जीशान अंसारी जी :
•    बिहार की पहली महिला आई पी एस अधिकारी आगे चलकर सरदार वल्लभ भाई पटेल पुलिस अकादमी की निदेशक बनती हैं यह उनकी दृढ़ता, अपने काम को लेकर सजगता और काबिलियत का ही फल है और साथ में इस देश में संविधान से मिली हमे ताकत और अवसरों में समानता का भी|
सौम्या मैम :
•    सोशल मीडिया पर प्रदर्शित किया गया जीवन अक्सर झूठ होता है|
•    हम जिन बातों की वजह से दुख में होते हैं कहीं न कहीं हम दुखों से तो छुटकारा चाहते हैं लेकिन बिना बातों/आदतों/चॉइस को छोड़े बिना!
प्रिया कश्यप:
•    अमृता-इमरोज पुस्तक से एक अंश को उद्धृत करती हुयी कहती हैं कि शादी के बाद भी जीवन मे शांति और ईमानदारी नहीं देखने को मिलती उस अवस्था मे  अगर अमृता इमरोज ने बिना शादी के भी यदि ईमानदारी से एक दूसरे का सहारा बनते हुये, एक दुसे का ख्याल रखते हुये अपना जीवन जिया है तो यह बात पहले पहल भले ही अजीब लगे लेकिन बाद में इसमे कोई खामी नहीं दिखती|
आरती मैम:
•    जीवन में सघर्षों से न घबराने पर एक कविता का पाठ किया जिसका एक अंश  निम्नलिखित है 

ये जरूरी नहीं कि तुम जीतों ही हर बार

गलती जो भी की है उसको करो स्वीकार

बस एक रास्ता गर कभी हो भी गया बंद

तुम रोना धोना नहीं बस मुस्कुराओ मंद मंद

अब शुरू होगा तुम्हारा असली वाला इम्तिहान

जो देगा तुम्हें मौका बनाने का खुद की पहचान

मिलेगा अनुभव यहीं और पैनी होगी धार

चाहे फिर इस पार हो या हो फिर उस पार


पार्थ कुमार:
कई बाल कविताओं का पाठ किया और कुछ कहानियों का वाचन भी किया, जो सभी पुस्तक साथियों के लिए रोचक रहा और यह बात भी साबित हुयी कि बच्चों के पास कहने के लिए बहुत कुछ है बशर्ते आपके पास सुनने के लिए समय हो|

लवकुश कुमार (परिचर्चा समन्वयक):
•    किसी क्षेत्र में काम करने वाले पहले इंसान को क्या क्या दिक्कतें होती हैं और वह कैसे अपनी आंतरिक दृढ़ता और स्पष्टता से इन चुनौतियों से पार पाता है या यूं कह लें कि एक पितृसत्तामक समाज में पहली महिला आई पी एस अधिकारी को कौन सी चुनौतियों से दो चार होना पड़ता है और वह उनसे कैसे पार पाती है, इस पर यदि किताब और साहित्य मौजूद हैं तो हम अन्य क्षेत्रों के लिए भी खुद को तैयार कर सकते हैं|
•    बच्चों के साथ सहज होकर उन्हे समझते हुये, खेल खेल में उन्हे सिखाने, अमूमन प्रकृति के बीच सैर के दौरान फूल और फल का बनना समझाना, पौष्टिक भोजन के महत्व को इस तरह व्यक्त करना कि हर रोज टिफ़िन में कुछ समुद्र से और कुछ पहाड़ से होना जरूरी  है और उन्हे अच्छा एवं खास महसूस कराते हुये और उनकी रुचियों के अनुरूप विद्यालय बनाने को लेकर लिखी गयी पुस्तक पर अपने विचार रखे|
•    उक्त पुस्तक से दो पोस्टर शामिल किए जा रहे हैं, अन्य पोस्टर के लिए kumarchetna.in/poster.php पर विजिट किया जा सकता है|


पुस्तक परिचर्चा मे शामिल सभी पुस्तक साथियों (Bookmates) ने पुस्तक परिचर्चा मे शामिल होकर/अभिव्यक्ति/सराहना/भागीदारी के माध्यम से इस पहल को पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने में, मानवीय मूल्यों के पोषण में, अपनी बात को बेहिचक रखने में महत्वपूर्ण माना एवं एक दूसरे के प्रति आभार व्यक्त किया ताकि इस जरूरी कार्य की नियमितता बनी रहे एवं समाज मे एक सकारात्मक बदलाव में अपना विनम्र योगदान सुनिश्चित किया जा सके |
धन्यवाद ज्ञापन के साथ परिचर्चा को अगली कड़ी तक के लिए विराम दिया गया|


इस आशा के साथ कि यह रिपोर्ट पाठकों को पुस्तक परिचर्चा को समझने और उसमे शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी |
अगली परिचर्चा 01 अगस्त, शनिवार रात 08:30 बजे होगी(जिसका ,लिंक निम्नलिखित है - https://meet.google.com/oko-yodo-zqc ), शामिल होकर पढ़ने-लिखने की संस्कृति पर काम करने में अपना योगदान सुनिश्चित करें और पुस्तक परिचर्चा से साहित्यिक लाभ लेते हुये अपने दिन की सार्थकता में एक और आयाम जोड़ें|


यदि आप भी समाज मे एक बेहतर बदलाव की आकांक्षा रखते हैं/ रखती हैं तो लोगों को अच्छी पुस्तकों से जोड़ना बहुत जरूरी है, उसी प्रयास का एक हिस्सा है यह परिचर्चा शृंखला|

 


केवल पढ़ें ही नहीं उसे अन्य लोगों के साथ साझा भी करें|


  धन्यवाद 
-लवकुश कुमार