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22वीं ऑनलाइन साप्ताहिक पुस्तक परिचर्चा 02-08-2026

बीते रविवार (02/08/2026 ) हम सबके सामूहिक प्रयास और वरिष्ठजनों के प्रोत्साहन से 22वीं साप्ताहिक पुस्तक परिचर्चा का ऑनलाइन आयोजन सफल रहा, जिसमें निम्नलिखित पुस्तकों पर सार्थक चर्चा हुयी:

अब पहुंची हो तुम – महेश चन्द्र पुनेठा : शिक्षाविद, समाज के अध्येता और साहित्यकार, आदरणीय पुनेठा सर की सामाजिक सरोकारों, मानवीय अहसासों और असंगतियों को लेकर संवेदित करने वाली कविताओं का संग्रह| प्रकाशक – समय साक्ष्य प्रकाशन देहारादून

प्रस्तावक – लवकुश कुमार

101 लघुकथाएँ– डॉ विजय अग्रवाल : हमारे रोज़मर्रा जीवन की छोटी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण घटनाओ पर पूर्व आई ए एस अधिकारी और शिक्षाविद आदरणीय डॉ अग्रवाल सर की बारीक नज़र के अवलोकन पर आधारित स्पष्टता देने वाली और संवेदित करने वाला एक बेहतरीन लघुकथा संग्रह| प्रकाशक – बेनतेन प्रकाशन, भोपाल  वेबसाइट- afeias.com

प्रस्तावक – सौम्या गुप्ता मैम

शिक्षा में प्रयोग: अनुभवों की दास्तान – अरविंद गुप्ता (चंद्रकला जोशी- शेखर जोशी स्मृति व्याख्यान -2 ): जाने माने प्रयोगिक विज्ञानी अरविंद गुप्ता सर द्वारा देश दुनिया के विभिन्न वैकल्पिक स्कूलों (परंपरागत स्कूल से अलग) के बारे जानकारी देने वाली और बच्चों के समुचित और अबाधित विकास के लिए जरूरी शैक्षणिक बदलावों पर बात करती एक पढ़ी जाने योग्य पुस्तक| प्रकाशक – नवारुण प्रकाशन, गाजियाबाद वेबसाइट- arvindguptatoys.com

प्रस्तावक – लवकुश कुमार

कबीरा सोई पीर है- प्रतिभा कटियार : जातीय दंश और समाज में महिलाओं की स्थिति की धरातल की सच्चाई से रूबरू कराता एक बेहतरीन उपन्यास जिसमें बताया गया है कि जिस पर बीतती है वही जानता है कि क्या होता है जातिगत भेदभाव और क्यों एक औरत ही दूसरी औरत की आजादी को बांध देती है|  सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते कुछ युवाओं को लेकर लिखा गया एक बेहतरीन उपन्यास|  

प्रस्तावक – आरती मैम

अंतस जरा ठहरिए – लवकुश कुमार : इस पुस्तक में युवाओं/किशोरों को ध्यान में रखकर रोज़मर्रा के मामलों को लेकर संवेदित करने वाले और जागरूक करने वाले लेखों का संकलन है और साथ ही अतिथि लेखकों की कविताएं और लेख तथा बेहतरीन पुस्तकों एवं फिल्मों की सूची, पाठकों को एक जिम्मेदार, साहसी और संवेदनशील इंसान बनने में मदद कर सकती है|

प्रकाशक – notion प्रकाशन चेन्नई के प्लैटफ़ार्म पर स्व प्रकाशन 

प्रस्तावक – अवनीश त्रिपाठी जी, राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं शोध संस्थान

मेरी दोस्त हवा- आचार्य प्रशांत

स्वच्छ हवा की महत्ता, इसके प्रदूषण के कारण और दुष्परिणामों को रेखांकित एक बेहतरीन सचित्र बाल कविता|

प्रस्तावक – पार्थ कुमार

उक्त परिचर्चा में निम्नलिखित पुस्तकसाथी शामिल रहे:

सौम्या मैम, अवनीश त्रिपाठी जी, आरती मैम, गायत्री जायसवाल,  उमा मैम, उर्मिला जायसवाल, पार्थ कुमार और लवकुश कुमार |

जिनके द्वारा मुख्यतः निम्नलिखित बिन्दुओं/विषयों/रचनाओं पर बात रखी गयी:

सौम्या मैम :

  • लघुकथा “अनंत खोज ” का पाठन किया और इस बात को रेखांकित किया कि जब हम खुद को दूसरों में ढूंढते हैं तब भी उनके लिए भले के काम कर जाते हैं|
  • उन्होने कहा कि अपने आस पास की घटनाओं की बारीकियों और मूल में जाकर उन पर लिखने के लिए एक संवेदनशील मन जरूरी होता है|

अवनीश त्रिपाठी जी:

  • पुस्तक अंतस- जरा ठहरिए पर बात रखी और उसमें शामिल आशुतोष उपाध्याय सर की कविता, “मिट्टी” का वाचन किया|
  • और इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चों को प्रकृति के बीच ले जाया जाए और साथ ही उन्हे बताया जाए कि बीज से पौधे और फिर पेड़ कैसे बनते हैं, हमारे घर आने वाली सब्जी और फल कहाँ से आते हैं|
  • उन्हे पौधारोपन सिखाया जाये, बारिश के पानी का अधिकतम इस्तेमाल और संचय सिखाया जाये, हमारे पारिस्थिकी में जानवरों का क्या महत्व है इस पर बात रखी जाए|
  • और उक्त पुस्तक में शामिल पुस्तक सूची से कुछ पुस्तकों पर अपने बात रखी यथा गबन, गोदान, गुनाहों का देवता, the alchemist इत्यादि
  • साथ ही आपके द्वारा एक बेहतरीन वेब सिरीज़ पर बात रखी गयी, जिसका नाम है, सपना वर्सेज एवरीवन जिसका मूल आप उसमें प्रयुक्त निम्न पंक्तियों से समझ सकते हैं

उम्र भर ख्याली भूतों से अगर मैं न डरता,

खुदा! मै क्या ज़ोर से जीता,

खुदा! मैं क्या चैन से मरता!”

आरती मैम:

  • जातिगत दंश क्या होता है यह वही जान सकता है जिसने झेला है|
  • जातिगत दंश हमें पूर्वाग्रहों से भर देते हैं|

पार्थ कुमार:

कई बाल कविताओं (खासकर आचार्य प्रशांत द्वारा लिखित, “मेरी दोस्त हवा” ) का पाठ किया और कुछ कहानियों का वाचन भी किया, जो सभी पुस्तक साथियों के लिए रोचक रहा और यह बात भी साबित हुयी कि बच्चों के पास कहने के लिए बहुत कुछ है बशर्ते आपके पास सुनने के लिए समय हो|

लवकुश कुमार (परिचर्चा समन्वयक):

  • प्रेम में इंसान एक से एक बेहतरीन और कठिन लगने वाले काम कर जाता है, अतः यदि सबके जीवन में प्रेम हो तो ये दुनिया और बेहतर हो सकती है|
  • अब पहुंची हो तुम, पुस्तक से दो कविताओं का पाठन किया, जिनके नाम नीचे दिये जा रहे हैं:-

किस मिट्टी के बने हैं पिताजी

  • जिसमें एक मेहनती, स्वावलंबी और शारीरिक श्रम को महत्व देने वाले/ प्रकृति से प्रेम करने वाले पिता के क्रियाकलापों और प्राथमिकताओं पर बात की गयी है|

कितना खतरनाक है 

  • जिसमें एक गिट्टी तोड़ने वाले मजदूर जोड़े के शिशु के जीवन पर लेखक ने बहुत ही संवेदना भरी दृष्टि से लिखा है और अचरज व्यक्त किया है कि कितना खतरनाक है यह कि बच्चे के लिए गिट्टियों की चुभन और धड़धड़ाती हुयी गाड़ियों की आवाज का पीढ़ी दर पीढ़ी आदत में ढल जाना|

पुस्तक परिचर्चा मे शामिल सभी पुस्तक साथियों (Bookmates) ने पुस्तक परिचर्चा मे शामिल होकर/अभिव्यक्ति/सराहना/भागीदारी के माध्यम से इस पहल को पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने मेंमानवीय मूल्यों के पोषण मेंअपनी बात को बेहिचक रखने में महत्वपूर्ण माना एवं एक दूसरे के प्रति आभार व्यक्त किया ताकि इस जरूरी कार्य की नियमितता बनी रहे एवं समाज मे एक सकारात्मक बदलाव में अपना विनम्र योगदान सुनिश्चित किया जा सके |

धन्यवाद ज्ञापन के साथ परिचर्चा को अगली कड़ी तक के लिए विराम दिया गया|

इस आशा के साथ कि यह रिपोर्ट पाठकों को पुस्तक परिचर्चा को समझने और उसमे शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी |

अगली परिचर्चा 08 अगस्त (शनिवार रात 08:30 बजे)  को होगी,

जिसमें जुड़ने का लिंक https://meet.google.com/swt-bgrq-xup है, शामिल होकर पढ़ने-लिखने की संस्कृति पर काम करने में अपना योगदान सुनिश्चित करें और पुस्तक परिचर्चा से साहित्यिक लाभ लेते हुये अपने दिन की सार्थकता में एक और आयाम जोड़ें|

यदि आप भी समाज मे एक बेहतर बदलाव की आकांक्षा रखते हैं/ रखती हैं तो लोगों को अच्छी पुस्तकों से जोड़ना बहुत जरूरी है, उसी प्रयास का एक हिस्सा है यह परिचर्चा शृंखला|

केवल पढ़ें ही नहीं उसे अन्य लोगों के साथ साझा भी करें|

  धन्यवाद 

-लवकुश कुमार