इस स्वतंत्रता दिवस पढ़िए, कुछ अलग और विचार कीजिए कि आप किस तरह योगदान कर रहे हमारे देश की स्वतंत्रता को बनाए रखने में। और हां क्या आपको पता है कि हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम के आदर्श क्या हैं ? अगर नहीं तो पढ़ें।
आइये संवेदनशील कवि संजय सर की कविता से मुलाकात करते हैं:
गुमनाम शहीद
गुमनाम शहीदों को मेरा सलाम भेजना,
अनजान मसीहों को मेरा सलाम भेजना,
उनकी शहादतों के क्या हैं मायने रहे,
हासिल हुए हैं जो उन्हें मुकाम भेजना।
गुमनाम शहीदों को मेरा सलाम भेजना……….
ए वक़्त तू गवाह शहादत के दौर का,
सो तू ही उनसे मिलके ये पैग़ाम भेजना,
उनकी वतन परस्ती से ये देश है कामिल,
जो चाहता है आज वो हो जाता है हासिल,
उनकी ही वफ़ाएँ हैं की ये गुलिस्ताँ बना,
इसकी महक के उनको तू गुलफाम भेजना।
गुमनाम शहीदों को मेरा सलाम भेजना……….
ना हमको याद है, ना ज़माने को याद है,
कुछ नाम जिनसे सज रहा ये माहताब है,
मौजूद हैं तुझमें वो नाम आज भी कहीं,
ए हवा हमको भी ज़रा वो नाम भेजना।
गुमनाम शहीदों को मेरा सलाम भेजना……….
अपनी किताब में सभी वो नाम लिखेंगे,
भूली हुई वो दास्ताँ भी याद करेंगे,
जी लेंगे हम भी दर्द वो,वो परेशानियां,
गुमनाम ए वफ़ा को दिल से दाद करेंगे,
ए वक़्त, ए हवा, ए चाँद सितारों,
वो याद हैं हमें सदा ये कह के बहारों,
मेरी सुबह, मेरे दिन-ओ-शाम भेजना,
लिख के यहाँ लाया हूँ शहीदों की याद में,
गुमनाम शहीदों को मेरा क़लाम भेजना ।
गुमनाम शहीदों को मेरा सलाम भेजना……….
- संजय सिंह 'अवध'
ईमेल- green2main@yahoo.co.in
उक्त मन को छूने वाली कविता के रचयिता भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में ATC अधिकारी हैं और अपने कालेज के दिनों से ही, जैसा कि इनकी रचनाओं से घोतक है, जन जन में संवेदना, करूणा और साहस भरने के साथ अंतर्विषयक समझ द्वारा उत्कृष्टता के पथ पर युवाओं को अग्रसर करने को प्रयासरत हैं।
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