हम अक्सर अपने से बड़ों के मुँह से सुनते हैं कि आजकल के बच्चों में जीवन-मूल्य, सामाजिक मूल्य या नैतिक मूल्य कम होते जा रहे हैं। झूठ का बोलबाला है, ईमानदारी कम हो रही है और लोगों में संवेदनशीलता भी घटती जा रही है।
लेकिन यहाँ मैं इसकी जड़ तक जाने की कोशिश कर रहा हूँ।
ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, साहस, दया और उदारता—ये केवल अच्छी बातें या किताबों में लिखे आदर्श नहीं हैं। इन्हें अपने जीवन में बनाए रखने के लिए कई बार मेहनत करनी पड़ती है, धैर्य रखना पड़ता है और यहाँ तक कि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष भी करना पड़ सकता है।
मसलन, ईमानदार रहना हमेशा आसान रास्ता नहीं होता। सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ सकती है। किसी के साथ खड़े होने के लिए अपनी सुविधा छोड़नी पड़ सकती है। सही बात पर टिके रहने के लिए अकेले खड़ा होना पड़ सकता है।
लेकिन अगर हमारी जीवनशैली का उद्देश्य ही यह हो जाए कि सब कुछ आराम से मिले, तुरंत मिले और हमें किसी तरह का संघर्ष न करना पड़े, तो धीरे-धीरे हम उस संघर्ष के लिए आवश्यक क्षमता विकसित करना ही बंद कर देंगे।
और शायद यहीं से मूल्यों का क्षरण शुरू होता है।
क्योंकि मूल्य केवल सिखाए नहीं जाते, उन्हें परिस्थितियों में निभाया जाता है।
और उन्हें निभाने के लिए कभी-कभी असुविधा, धैर्य और संघर्ष—तीनों को स्वीकार करना पड़ता है।
इसलिए शायद सवाल केवल यह नहीं है कि “आज की पीढ़ी में मूल्य क्यों कम हो रहे हैं?”
एक सवाल यह भी होना चाहिए—
“क्या हमने उन्हें उन मूल्यों के लिए संघर्ष करना सिखाया है?”
प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा
धन्यवाद
-लवकुश कुमार
लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और अपने कार्यालयी दायित्व से इत्तर संवेदनशीलता के प्रवाह हेतु साहित्य के प्रचार प्रसार हेतु प्रयासरत हैं|
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना अपने जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट। वेबसाइट के उद्देश्य के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो kumarchetnapsw@gmail.com पर ईमेल करें।