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पितृसत्ता (कविता) - सौम्या

पुरुषों ने नहीं रहने दिया इंसान किसी को 

स्त्री को बनाया देवी कि वो सब सह जाए 

किन्नर में कहा कि देवता वास करते हैं इनके हृदय में 

जिससे इस व्यवस्था में रह सके सिर्फ वहीं इंसान 

और बने रहे अन्य सभी लिंगों के स्वामी 

क्योंकि इंसान बने रहना ही था सबसे अच्छा 

इसीलिए उन्होंने अपने लिए चुना इंसान रहना 

पुरुषत्व पर भी रखा सिर्फ अपना वर्चस्व 

सारे कल्याण के काम खुद ही करने लगे 

स्त्रियों की सुरक्षा से पालन पोषण तक 

उसके तन से लेकर मन तक 

किया अपना ही अधिकार 

पर इस वर्चस्व से सबसे ज्यादा मुसीबत में पड़ा भी पुरुष 

महिला तो दासी बनी ही 

पर पुरुष ने भी महिला को इतना दुर्लभ बनाया 

कि वो भी उसका दास हो गया 

कभी मानसिक तौर पर तो कभी शारीरिक

 

-सौम्या 

बाराबंकी उत्तर प्रदेश 

सौम्या जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |


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