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बीते रविवार (29-03-2026) हम सबके सामूहिक प्रयास और आदरणीय महेश चन्द्र पुनेठा सर के प्रोत्साहन से चौथी साप्ताहिक पुस्तक परिचर्चा का ऑनलाइन आयोजन सफल रहा, जिसमें निम्नलिखित पुस्तकों/रचनाओं/विषयों पर सार्थक चर्चा हुयी:

उक्त कार्यक्रम मे निम्नलिखित पुस्तकसाथी मौजूद रहे:
अंशिका, सौम्या, सिद्धि, प्रिया, विशाल चंद,अंकित मिश्रा, लक्ष्मण,कमल, अंशुल, कल्याण, अरविंद, सचिन, गायत्री,अंकित,हिमांशु, राजन,अंजना, कृष्णकांत,उर्मिला, oak ride एवं लवकुश|

पुस्तक परिचर्चा मे शामिल सभी पुस्तक साथियों (bookmates) ने पुस्तक परिचर्चा मे शामिल होकर/अभिव्यक्ति/सराहना/भागीदारी के माध्यम से इस पहल को पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने में, मानवीय मूल्यों के पोषण में, अपनी बात को बेहिचक रखने में महत्वपूर्ण माना एवं एक दूसरे के प्रति आभार व्यक्त किया ताकि इस जरूरी कार्य की नियमितता बनी रहे एवं समाज मे एक सकारात्मक बदलाव में अपना विनम्र योगदान सुनिश्चित किया जा सके |
धन्यवाद

प्रस्तुत है, कवयित्री सौम्या जी की एक कविता, जो महिलाओं की बदलते हुए सामाजिक भूमिकाओं के बारे में है। यह प्रश्न उठाती है कि क्या समाज इस बदलाव के लिए तैयार है, और यह परंपरागत मान्यताओं और पितृसत्तात्मक अपेक्षाओं पर भी सवाल उठाती है।
मैंने सुना है एक प्रश्न जिसमें पूछा जाता है
कि जब आज स्त्रियां बदल रही हैं,
वो अब दूसरों से पहले स्वयं को चुन रही हैं
वो अब रसोईघर से पहले अपने अन्य हुनर को चुन रही हैं
अब वो खुद का अलग अस्तित्व भी ढूंढ रही हैं
बेबाक होकर बोल रही हैं, खेल रही है, उड़ भी रही हैं
क्या समाज इस परिवर्तन के लिए तैयार है?
तो मुझे ऐसा लगता है, कि नहीं
समाज का एक वर्ग आज भी इस परिवर्तन को नहीं देखना चाहता
वह चाहता है वही पुरानी रुढियों में लिपटी स्त्री
जिसके मुंह में न जुबान हो और न दिमाग़ में अपने कोई विचार
पिता, पति और पुत्र पर निर्भर स्त्री
जो एक कदम भी बिना किसी के सहारे के न चल सके
जो हमेशा चले पुरुषों से एक कदम पीछे
जो समर्पित कर दे अपने जीवन का एक-एक पल
पुरुषों के लिए
चाहे वह पुरुष दो पल भी न निकाल सके औरत के लिए
चाहे वह पुरुष, औरत का सम्मान भी करना न जानता हो
पर पुरुषों को आज भी चाहिए गूंगी गुड़िया|
-सौम्या
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
सौम्या जी इतिहास मे परास्नातक हैं और शिक्षण का अनुभव रखने के साथ समसामयिक विषयों पर लेखन और चिंतन उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं |
आइए कुछ प्रश्नों के माध्यम से कविता के निहित अर्थ को अच्छे से समझने का प्रयास करते हैं:
इस कविता में महिलाओं के विषय में क्या विचार व्यक्त किए गए हैं?
इस कविता में महिलाओं के बदलते सामाजिक भूमिकाओं और स्वतंत्रता की खोज पर विचार व्यक्त किए गए हैं। यह उन पुरानी परंपराओं पर सवाल उठाता है जो महिलाओं को पुरुषों पर निर्भर रहने और खुद को सीमित करने के लिए मजबूर करती हैं। कविता में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि समाज इस बदलाव के लिए तैयार नहीं है और अब भी कुछ लोग महिलाओं को पुरानी रूढ़ियों में देखना चाहते हैं।
इस कविता में समाज के प्रति क्या सवाल उठाया गया है?
इस कविता में समाज से यह सवाल पूछा गया है कि क्या वह महिलाओं के इस बदलाव को स्वीकार करने के लिए तैयार है। यह सवाल समाज की मानसिकता और महिलाओं के प्रति उसके दृष्टिकोण पर प्रकाश डालता है। कविता में इस बात पर जोर दिया गया है कि समाज का एक वर्ग अब भी महिलाओं को पुरानी भूमिकाओं में देखना चाहता है, जो उनके विकास और स्वतंत्रता में बाधा डालता है।
कवयित्री महिलाओं के लिए किस प्रकार की स्वतंत्रता की वकालत करती है?
कवयित्री महिलाओं के लिए एक ऐसी स्वतंत्रता की वकालत करती है जिसमें वे अपनी पसंद खुद कर सकें, अपने काम को चुन सकें, और एक अलग अस्तित्व ढूंढ सकें। यह स्वतंत्रता उन्हें बेबाक होकर बोलने, खेलने और उड़ने का अधिकार देती है, जिसका अर्थ है कि वे बिना किसी डर के अपनी इच्छाओं और सपनों को पूरा कर सकें।
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शुभकामनाएं
मानव हो, न मानविकी से दूर रहो
पढ़ो तुम विज्ञान, लेकिन समझना समाज को भी
ताकि कर सको आविष्कार,
समाज के स्थायित्व के लिए |
है जरूरी गणित,
आदान-प्रदान और विज्ञान तथा आकाश मे यात्राओं के लिए,
लेकिन पढ़ो तुम साहित्य भी,
ताकि हर यात्रा को एक उचित उद्देश्य दे सको
मानव हो, न मानविकी से दूर रहो |
पढ़ो तुम सांख्यिकी और जुटाओ आकड़ें,
इंसान की व्यवस्थाओं और दिक्कतों को समझकर
हल करने के लिए,
लेकिन भूल न जाना साहित्य और इतिहास की ओर रुख करना
जो तुम्हें, वाकिफ कराएगी इंसान की आकांक्षाओं, व्यवहार और असली जरूरतों से
मानव हो, न मानविकी से दूर रहो|
तुम भौतिकी भी पढना, रसायन शास्त्र और जन्तु विज्ञान भी,
लेकिन साथ मे समझना कला और सुंदरता को भी,
ताकि जान सको इंसान के जीवन मे सहूलियत और सुरक्षा के साथ
सृजनात्मकता, अभिव्यक्ति, उत्साह और रचनात्मकता के महत्व को भी,
इंजीनियर बनो, डॉक्टर बनो और साथ मे बनना एक संवेदनशील इंसान भी,
ताकि अपने काम के केंद्र मे रख सको, काम से मिलने वाला आनंद,
ना कि कभी ना ख़त्म होने वाली नंबर वन बनने की भूख,
इसके लिए जरूरी है की आप उनकी भी कहानियाँ पढ़ो
जिनसे कभी मिले नहीं, जिनके बीच कभी रहे नहीं,
ताकि जान सको उनकी भी तकलीफ़ें और समझ सको
उनकी व्यवहार के पीछे की परिस्थिति, आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं को भी,
और तब कहीं जान पाओगे कि जीवन के उद्देश्य मे केवल आराम,
मन मुताबिक इंसान और चीज़ों का पाना ही नहीं होता,
इसमे हो सकता है समाज मे असमानता को कम करना,
और लोगों को गरिमामय जीवन देकर,
अच्छा स्वास्थ्य और आवास देकर
उनके चेहरे पर मुस्कान और जीवन मे उत्कृष्टता लाना भी |
बन जाना तुम वकील, पढ़कर कानून की किताबें,
लेकिन न भूलना इतिहास और मनोविज्ञान की आधारभूत समझ हासिल करना
ताकि समझ सको कि हम यहाँ तक कैसे पहुंचे और भावनाओं मे बहकर या दबाव और लालच मे आकर किये गए अनुचित के समर्थन,
ने हमे कहाँ लाकर खड़ा कर दिया है !
ताकि बचा सको खुद को किसी अनुचित इंसान को समर्थन देने से,
क्योंकि जिसे इंसान मज़बूरी कहता है, वह एक चुना हुआ विकल्प होता है,
जिसमे इंसान अपने क्षुद्र स्वार्थों और सुविधा के चलते समाज मे अन्याय होने के रास्ते को अनजाने में समर्थन दे देता है,
और भूल जाता है कि इस तरह यदि संघर्ष और मानवीय मूल्यों के ऊपर हर कोई सुविधा को तरजीह देने लगे तो एक दिन भारी असुविधाओं और दिक्कतें उसे भी घेर सकती हैं,
इस बात को और अच्छे से समझना है तो मानविकी से ना दूर रहो|
बन जाना तुम एक प्रशासनिक अधिकारी
पर साथ मे बनना समाज के अध्येता भी,
हो सकता है कि तुम्हें अधिकारी बनने
मे वक़्त लग जाए,
लेकिन एक बात तय होगी कि तुम
लोगों को उनकी परिस्थितियों के प्रकाश मे देख पाने मे सक्षम होगी
और ले पाओगी ऐसे निर्णय जो लोगों में प्रेम,
उम्मीद और विश्वास जगा सकें
ना कि नफरत और निराशा के भाव,
मानव हो, न मानविकी से दूर रहो |
बन सको तो शिक्षक बनना,
बस एक बात याद रखना
अपने विषय तक सीमित न रहना,
समझना मानविकी के विषयों को भी
माने साहित्य, इतिहास, दर्शनशास्त्र, भाषाविज्ञान, धर्म, और कला,
ताकि वक़्त जरूरत अपने विद्यार्थियों के समग्र और समावेशी विकास
और आलोचनात्मक रूप से सोचने मे योगदान दे सको,
ताकि सुनिश्चित हो सके,
समाज मे मनुष्य की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का अध्ययन
मानव हो, न मानविकी से दूर रहो|
बन जाना तुम उद्यमी और व्यापारी,
लेकिन वक़्त रखना, आध्यात्मिक अध्ययन के लिए भी,
ताकि समझ सको कि पैसे का उद्देश्य,
केवल काम और संपत्ति का विस्तार ही नहीं,
इसे अध्ययन और समसरता के प्रसार मे भी लगाया जा सकता है,
और समझ लेना इस बात को भी कि भोगने से शांति नहीं मिलती
शांति मिलती है, चाहत के मिटने से,
व्यापार करना सामान का, ना कि विश्वास, असुरक्षा और दिखावे का
मानव हो, न मानविकी से दूर रहो |
तुम जरूर समझना कि आकाश नीला क्यों होता है,
और कैसे होता है चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण,
लेकिन मत चूकना तुम यह समझने से कि इंसान कैसे सोचता है,
कैसे व्यवहार करता है, और कैसे करता है अपनी अभिव्यक्ति,
क्योंकि ये जाने बिना तुम अपने विज्ञान का एक सीमित उपयोग
ही कर पाओगे, इंसान की मदद करने में
मानव हो, न मानविकी से दूर रहो |
लोगों ने अपनी जीवन को निचोड़ा है साहित्य कोश को समृद्ध करने को,
ताकि न चूकें हम विभिन्न संस्कृतियों को समझने,
आलोचनात्मक रूप से सोचने और मानवीय अनुभवों
यथा सुख-दुःख, प्रेम-घृणा की गहरी समझ विकसित करने में,
इसीलिए आओ जरा संग करो उनका भी,
जो अब नहीं हैं हमारे बीच, लेकिन उनकी लेखनी है मौजूद,
लगता है अच्छा किसी का साथ और बातें तो किताबों की खिड़की में भी झाँकों,
इसमें भी है एक साथी जिससे आप कह सकती हैं कि,
आपसे मिलकर, आपको पढ़कर अच्छा लगा,
और इस तरह तय करना एक रास्ता,
एक संवेदनशील, करुण और साहसी इंसान बनने का,
मानव हो, न मानविकी से दूर रहना |
- लवकुश कुमार
कवि भौतिकी में परास्नातक हैं और उनके लेखन का उद्देश्य समाज की उन्नति और बेहतरी के लिए अपने विचार साझा करना है ताकि उत्कृष्टता, अध्ययन और विमर्श को प्रोत्साहित कर देश और समाज के उन्नयन में अपना बेहतर योगदान दिया जा सके, साथ ही वह मानते हैं कि सामाजिक विषयों पर लेखन और चिंतन शिक्षित लोगों का दायित्व है और उन्हें दृढ़ विश्वास है कि स्पष्टता ही मजबूत कदम उठाने मे मदद करती है और इस विश्वास के साथ कि अच्छा साहित्य ही युवाओं को हर तरह से मजबूत करके देश को महाशक्ति और पूर्णतया आत्मनिर्भर बनाने मे बेहतर योगदान दे पाने मे सक्षम करेगा, वह साहित्य अध्ययन को प्रोत्साहित करने को प्रयासरत हैं,
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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शुभकामनाएं
प्रस्तुत है किताबों की सूची आपके संज्ञान के लिए :
1.सदा सफल हनुमान-- यह एक अद्भुत पुस्तक है इस पुस्तक में हनुमान जी के चरित्र के प्रबंधन और समन्वय से कार्य करने के तरीके/गुणों पर प्रकाश डाला गया है |
लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल
2.पढ़ो तो ऐसे पढ़ो -- इस पुस्तक में कैसे पढ़ना चाहिए ताकि याद रखना, समझना और समझाना आसान हो सके, इस बारे में बहुत विस्तार से बताया है
लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल
3.स्टूडेंट और मन की शक्ति-- इस पुस्तक में विद्यार्थियों के विद्यार्थी जीवन की समस्याओं के बारे में बताया गया है और मन की शक्ति पर प्रकाश डाल एक सही दिशा देकर, विद्यार्थियों को दक्षता और आत्मविश्वास के लिए जरूरी गुर सिखाये गए हैं |
लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल
4.तृषित --- इस पुस्तक में डॉक्टर विजय अग्रवाल सर की जीवन कथा के बारे में बताया गया है उनके जीवन में उन्होंने कितने संघर्ष किए हैं उनका विस्तार से वर्णन किया गया है यह बहुत ज्यादा प्रभावित करने वाली और हिम्मत देने वाली पुस्तक है, जिससे स्टूडेंट अपने मन में सर की बातों को उतार सकें और अपने जीवन को एक सार्थक दिशा दे सकें |
लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल
5.आजादी की रात-- यह पुस्तक हमारे भारत के बारे में, हमारे इतिहास से जुड़ी घटनाओं से संबंधित हैं इस पुस्तक में हमारे संविधान की विस्तार से विवेचना की गई है|
लेखक-- डोमिनीक लापिएर लैरी किॅलिन्स
6.स्टूडेंट और प्रेम की समझ-- यह पुस्तक प्रेम के बारे में बताती है कि प्रेम क्या होता है, यह स्टूडेंट्स को ध्यान मे रखकर लिखी गयी है ताकि वह अपने जीवन में इस बाबत सही निर्णय ले सकें और घटनाओं, अनुभवों को सही परिप्रेक्ष्य मे देख सकें, यह स्टूडेंट्स के लिए बहुत अच्छी और जरूरी पुस्तक है जिससे वह अपनी असली जरूरतों और प्राथमिकताओं को समझ कर उचित एवं सही रास्ता चुन सकें तथा खुद की ऊर्जा और समय को जरूरी चीजों पर लगाकर अपने जीवन को अर्थ दे सकें |
लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल
7.स्टूडेंट और टाइम मैनेजमेंट--- इस पुस्तक में टाइम मैनेजमेंट के बारे में बताया गया है, हम अपने जीवन मे कैसे टाइम को मैनेज करें, काम और पढ़ाई के साथ ताकि दक्षता आए और हम शांति से काम कर सकें |
लेखक--- डॉ विजय अग्रवाल
- प्रिया
बरेली, उत्तर प्रदेश
प्रिया जी स्नातक की विद्यार्थी हैं और सिविल सेवाओं की परीक्षा के लिए खुद को तैयार कर रही हैं|
आप कविताओं द्वारा स्वयं के विचारों और भावनाओं को व्यक्त करती हैं | समाज मे आपकी गहरी रुचि है और लोगों की मदद करने मे आपको एक अनोखी अनुभूति महसूस होती है, जो आपको और बेहतर करने को प्रेरित करती है|
इस बाबत कवि भवानी प्रसाद मिश्र जी की कुछ पंक्तियाँ याद आती हैं :
कुछ लिख के सो,
कुछ पढ़ के सो,
तू जिस जगह जागा सवेरे,
उस जगह से बढ़ के सो"
नए कवियों को निर्देशित करती वरिष्ठ कवि महेश चन्द्र पुनेठा जी की कविता, "पहली कोशिश" भी प्रासंगिक है:
मैं न लिख पाऊँ एक अच्छी कविता
दुनिया एक इंच इधर से उधर नहीं होगी
गर मैं न जी पाऊँ कविता
दुनिया में अंधेरा कुछ और बढ़ जाएगा
इसलिए मेरी पहली कोशिश है
कि मरने न पाए मेरे भीतर की कविता।
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शुभकामनाएं
प्रस्तुत है किताबों की सूची आपके संज्ञान के लिए :
आजादी मेरा ब्रांड - अनुराधा बेनीवाल, अकेली लड़की के यूरोप घूमने की कहानी।
बेहया -विनीता अस्थाना, स्वतंत्र स्त्री का जीवन, घरेलू हिंसा और उसके चरित्र पर सवाल उठता समाज।
जितनी मिट्टी उतना सोना - अशोक पांडे उत्तराखंड के सुदूर हिमालय में बसी रं जनजाति की परंपरा को समझने में मददगार।
उसके हिस्से की धूप -मृदुला गर्ग, विवाह से इतर प्रेम और आत्मतलाश में भटकती स्त्री की कहानी
तुम्हारे लिए -हिमांशु जोशी, छात्र जीवन, संघर्ष, प्रेम और शहर से जुड़ाव।
डार से बिछुड़ी -कृष्णा सोबती, अपनो द्वारा त्याग और स्त्री जीवन की त्रासदी की कहानी।
- शीतल
शीतल जी, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के एक दूरस्थ पहाड़ी गांव भट्टयूडा से आती हैं। आपने अपना परास्नातक, भूगोल विषय में लक्ष्मण सिंह मेहर कैंपस पिथौरागढ़ से किया है। आप सामाजिक खांचों में फिट नहीं होना चाहती, इसे इस परिप्रेक्ष्य मे देखें कि आप हर वह रिवाज नकारना चाहती हैं जो आपको एक लड़की होने का हवाला देकर कम आंकते हो।
किताबें संवेदनशील ,सामाजिक ,निर्भय और वैज्ञानिक चेतना देती हैं, अतः किताबें पढ़ना, नया जानते रहकर अपनी समझ को विस्तार देते रहना आपकी आदत मे शुमार है। आपको फिल्में देखना पसंद है, और घूमना भी। भूगोल आपको अपनी ओर खींचती है साथ ही नए और रचनात्मक लोगों के साथ बात करने और उनके बारे में जानने को उत्सुक रहती हैं |
इस आशा के साथ कि शीतल जी की समझ और लेखनी, सुधी पाठकों की समझ को एक नया आयाम देकर उसको विस्तार देगी और एक संवेदनशील इंसान बनने का मार्ग प्रशस्त करेगी, ढेरों शुभकामनायें
सम्पादक
लवकुश कुमार
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शुभकामनाएं
प्रस्तुत है आपके संज्ञान के लिए :
सारा आकाश – राजेंद्र यादव: एक युवा की बेरोजगारी, पारिवारिक दबाव और स्वतंत्रता की तलाश की कहानी।
यादों की बारात – जोश मलीहाबादी: एक उर्दू शायर की आत्मकथा, जो विभाजन और उसकी व्यथा का दस्तावेज़ है।
उसके हिस्से की धूप – मृदुला गर्ग: एक नारी की स्वतंत्रता और प्रेम-विवाह के बीच की लड़ाई की क्रांतिकारी कहानी।
तीन एकांत – निर्मल वर्मा: तीन मोनोलॉग वाली कहानियाँ, जो अकेलेपन और आत्मसंवाद को उजागर करती हैं।
गबन – मुंशी प्रेमचंद: दिखावे की चाह और आर्थिक शोषण के कारण एक युवक का पतन।
नैनीताला नैनीताला – पुष्पेश पंत: नैनीताल की आत्मा, एक शहर और लेखक के बीच जुड़ाव का जादुई वृत्तांत।
छानी-खरीकों में: जहाँ रास्ता नहीं होता – उमेश पंत: उत्तराखंड की दूरस्थ यात्राओं का संवेदनशील चित्रण, जो समाज, प्रकृति और बदलते वक्त का अध्ययन है।
रात का रिपोर्टर – निर्मल वर्मा: आपातकाल और मानसिक संकट की पृष्ठभूमि में एक पत्रकार की आंतरिक लड़ाई की गहराई से लिखी गई कहानी।
तुम पहले क्यों नहीं आए ? - कैलाश सत्यार्थी
बालश्रम और मानवता के लिए सतत संघर्ष करने वाले कैलाश सत्यार्थी द्वारा लिखी गई 12 बच्चों की जीवन कथाएं है।
कगार की आग - हिमांशु जोशी - एक "दलित" "महिला" की मार्मिक कथा
नौकर की कमीज — विनोद कुमार शुक्ल
मध्यमवर्गीय जीवन की छोटी-छोटी परेशानियों और आत्मसम्मान को बेहद संवेदनशील तरीके से समझने के लिए।
गोदान — मुंशी प्रेमचंद
भारतीय किसान के संघर्ष और सामाजिक व्यवस्था की सच्चाई को गहराई से दिखाने वाला महान उपन्यास।
गुनाहों का देवता — धर्मवीर भारती
प्रेम, त्याग और भावनाओं की जटिलता को बहुत मार्मिक तरीके से समझने के लिए।
राग दरबारी — श्रीलाल शुक्ल
भारतीय ग्रामीण राजनीति और व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य, समझने के लिए।
The Alchemist — Paulo Coelho
अपने सपनों का पीछा करने और जीवन का उद्देश्य खोजने और स्वयं में पाने की प्रेरणा देने वाली कहानी।
1984 — George Orwell
सत्ता, निगरानी और स्वतंत्रता पर खतरे को समझने के लिए।
मैला आंचल — फणीश्वर नाथ रेणु
भारतीय गाँव के जीवन, राजनीति और संस्कृति का बहुत जीवंत चित्र देखने के लिए।
कामायनी — जयशंकर प्रसाद
मानव भावनाओं और दर्शन को काव्यात्मक रूप में समझने के लिए।
चित्रलेखा — भगवती चरण वर्मा
पाप और पुण्य के असली अर्थ पर गहरा दार्शनिक सवाल उठाने वाली कहानी।
The Psychology of Money — Morgan Housel
पैसा कमाने से ज़्यादा, पैसे के बारे में सही सोच विकसित करने के लिए।
To Kill a Mockingbird — Harper Lee
न्याय, नस्लवाद और इंसानियत के मूल्यों को समझने के लिए।
" पढ़ें, समझें, बात करें और साझा भी "
शुभकामनाएं
विशाल चन्द @reading_owl.3
https://www.facebook.com/vishal.chandji
https://www.instagram.com/reading_owl.3
विशाल चन्द जी समाजशास्त्र के शोधार्थी, पाठक और संवेदनशील शिक्षार्थी हैं। नवीन ज्ञान अर्जन और सतत सीखना आपके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। पुस्तकों का पठन और संग्रहण आपको विशेष प्रिय है।
आपके भीतर एक घुमक्कड़ चेतना भी सक्रिय है, जो आपको नए लोगों, स्थानों और अनुभवों से जोड़ती रहती है। बागवानी आपके लिए प्रकृति से संवाद का माध्यम है।
आप समाज को अपने स्वतंत्र दृष्टिकोण से देखने और विभिन्न समूहों के साथ मिलकर सामाजिक दायित्वों के निर्वहन को निरंतर प्रयासरत रहते हैं।
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
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यदि आपको समाज की दिक्कतें विचलित करती हैं और आपका भी मन करता है कि समाज के लिए कुछ करें, या आप चाहते हैं कि आपका बच्चा गलत संगति से बचा रहे और दूसरों की तकलीफ समझे और अपने पैरों पर खड़ा हो, दिक्कतों में घबराए नहीं, तो यह लेख आपके लिए है।
स्वयं के लिए और समाज के भले के लिए एक अच्छा काम हो सकता है कि हम साहित्य अध्ययन की संस्कृति विकसित करें, साहित्य ही इंसान को चिंतनशील बनाता है ताकि वह अपने इतर अन्य लोगों के दृष्टिकोण को समझ उनसे तालमेल बिठा सके और उनसे प्रेम कर सकें।
साहित्य, लेखक के अनुभवों का निचोड़ होता है, साहित्य पढ़कर हम किसी ऐसे समझदार इंसान की संगति पा सकते हैं जो अब हमारे बीच नहीं।
साहित्य अध्ययन हमारी समझ को विस्तार देता है, हम दयालु, साहसी और जिम्मेदार बनते हैं, कोई भी निर्णय लेना आसान होता है, क्योंकि स्पष्टता मिलती है, पता चलता है कि चीजें काम कैसे करती हैं, धारणाएं टूटतीं हैं और हमारा सामना सच से होता है।
उस धारणा को तोड़ना होगा कि कहानी, कविता और उपन्यास वगैरह तो मन बहलाने और टाइमपास करने के लिए हैं, सच्चाई तो यह है कि इन्हें पढ़कर ही हम अपने सीमित दायरे से हटकर अन्य लोगों की परिस्थितियों को समझ पाते हैं और उनकी दिक्कतों के प्रति संवेदनशील हो पाते हैं, हो सकता है कि साहित्य अध्ययन में आप किसी ऐसे इंसान के बारे में पढ़ें जिसने संघर्षों में हार न मानी हो, इससे आपको भी हिम्मत मिलती है।
वरिष्ठ लेखक, श्री महेश चंद्र पुनेठा जी अपनी पुस्तक, " शिक्षा के सवाल" में रेखांकित करते हैं कि शिक्षा के सवाल जीवन के सवालों से भिन्न नहीं हैं| जीवन को सृजनशील बनाना हो या समाज को शांतिमय, वह कहते हैं कि इसके लिए हमें पहले शिक्षा के सवालों को हल करना पड़ेगा, क्योंकि जीवन-समाज और शिक्षा अन्योन्याश्रित हैं।
आइये अपनी दिनचर्या का आधा घंटा ही सही, साहित्य अध्ययन को दें, बच्चे आपकी ही नकल करेंगे, वह किसी गलत संगति में पड़ें इससे बेहतर है कि वह कहानियों और उपन्यास के ज्ञान सागर में गोते लगाएं।
पढ़ें भी और साझा भी करें, घर में एक छोटी सी लाइब्रेरी बनाए और जैसा कि आदरणीय महेश पुनेठा सर कहते हैं कि साहित्य अध्ययन में जीवन को पढ़ना होता है न कि प्रतियोगी परीक्षा की किताबों को।
नियमित होने के लिए, हर हफ्ते या पंद्रह दिन पर अपने ४-५ दोस्तों के साथ मिलकर प्रत्यक्ष या आनलाइन पुस्तक परिचर्चा आयोजित करें और अपनी पढ़ी हुई पुस्तकों पर चर्चा करें और इस मुहिम को अन्य लोगों के साथ साझा करें, बिना यह सोचे कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं क्योंकि यह एक जरूरी काम है।
अपनी मुहिम की फोटो मुझे ईमेल कर सकते/सकती हैं मैं उन्हें अपनी वेबसाइट पर आपके नाम के साथ अपलोड करूंगा ताकि और लोग भी इस मुहिम को आगे बढ़ा सकें।
One more page initiative by literary Land
ढेरों शुभकामनाएं
- लवकुश कुमार
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सबसे पहले बात कि कौन-कौन शामिल होता है
"कुछ समन्वयक, सुधी पाठक, वरिष्ठ लेखक और समाज के अध्येता"
क्या होता है?
समन्वयक अपनी मन बांध लेने वाली भाषा शैली में सभी को संबोधित करते हैं फिर शामिल पाठक स्वयं द्वारा पढ़ी हुयी पुस्तक पर चर्चा करने की इच्छा व्यक्त करते हैं और समन्वयक उनसे बारी-बारी से आग्रह करते हैं अपनी पुस्तक पर अवलोकन, अनुभव और सीख साझा करने को |
क्या-क्या मिल सकता है जो आपके लिए उपयोगी हो
सबसे पहले उन्हे संबोधित करता हूँ जो किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हे लग सकता है कि प्रतियोगी परीक्षा मे इन साहित्यिक किताबों का क्या महत्व :महत्व है, खूब महत्व है
सोंच व्यापक होगी, एक से एक मेहनती और त्यागशील, न्यायशील और बहादुर लोगों के बारे मे पढ़कर और सुनकर जो स्पष्टता आएगी वो आपको बेहतर और नियमित तैयारी के लिए प्रेरित करेगी
अगर आपके जीवन मे संघर्ष हैं तो हो सकता है कि आप ऐसे इंसान के बारे मे पढ़ लें या सुन लें जिन्होने विकट परिस्थितियों मे भी हिम्मत बांधकर मेहनत की और अपने साथ दूसरों का भी भला कर सके, माने फिर आपको अपनी दिक्कतें छोटी लगने लगेंगी|
हो सकता है कि आपको जीवन उद्देश्यहीन लग रहा हो, सब कुछ खत्म सा दिख रहा हो, तब भी आपको अपने जीवन को अर्थ देने के कई तरीके मिल सकते हैं
हो सकता है कि पढ़ाई के दौरान भी जीवन या पढ़ाई से जुड़ी कोई बात आपके पढ़ाई के हिस्से का वक़्त जाया कर रही हो, उस अवस्था मे एक अच्छी किताब के साथ बिताए नियमित कुछ मिनट्स आपके मन को शांति प्रदान कर आपकी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को और बेहतर/दक्ष कर सकते हैं
हो सकता है कि किसी उधेड़बुन मे हों और आपको कोई रास्ता दिखाने वाली पुस्तक का नाम मिल जाए
हो सकता है कि आप कोई निर्णय न ले पा रही हों और कोई ऐसी पुस्तक के बारे मे चर्चा हो जाए जो आपको उस विषय पर स्पष्टता दे सके
हो सकता है कि आप कोई नया काम करना चाहते हों, तरीका न सूझ रहा हो और आपको किसी ऐसे इंसान कि पुस्तक के बारे मे पता चले जो उसी काम पर अपने अनुभव साझा किए हों |
एक जागरूक, जिम्मेदार और शिक्षित नागरिक के तौर पर आपका ध्यान जरूरी मुद्दों की तरफ जाएगा, जो हमारे परिवेश या हमारे लोगों को / उनके मन को प्रभावित करते हों
विभिन्न परिप्रेक्ष्य मे चीजों को समझने के लिए अलग अलग किताबों के बारे मे जानने का मौका
उम्र भर के अनुभवों का निचोड़ होता है किताबों में, आप उस समझ को हासिल कर लोगों के साथ बेहतर ताल मेल बैठा कर कार्य कर सकते/सकती हैं |
हम सबके जीवन मे कोई दोस्त होता है जिसका साथ अच्छा लगता है, क्योंकि उसकी बातें रुचिकर लगती हैं, कितना अच्छा हो कि इतिहास के किसी महान इंसान का आपको साथ मिल पाये, उनकी किताब पढ़कर |
एक समूह से परिचय होगा जो आपकी ही तरह साहित्य अध्ययन को अपनी दिनचर्या मे स्थान देकर, समाज की एक समवेशी छवि चाहता है अपने मन मे, लोगों को उनके संघर्षों और आकांक्षाओं के साथ स्वीकार करना चाहता है, कुछ बदलाव की बात और फिर अपने स्तर पर काम ताकि लोगों के जीवन मे गरिमा, स्वतन्त्रता, उत्कृष्टता और संपन्नता मिल पाये और ज्यादा से ज्यादा लोग देश के विकास और स्थायित्व मे अपने योगदान दे सकें |
और क्या सीख सकते हैं आपमें क्या बेहतरी हो सकती है पुस्तक परिचर्चा के बाद इसके लिए मेरा ये एक लेख पढ़ा जा सकता है, लिंक नीचे है :
किताबों से हम क्या पा सकते हैं : Book Meet ( पुस्तकों पर चर्चा ) एक सार्थक प्रयास और जरूरी भी
एक रोचक लेख विशाल चंद जी की तरफ से - आप जो ढूंढ रहे हैं वह मिलेगा लाइब्रेरी में (मिचिको आओयामा) - लघु समीक्षा सह परिचय - समीक्षक विशाल चंद
मिलते हैं परिचर्चा मे |
शुभकामनायें
-लवकुश कुमार
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
वेबसाइट के उद्देश्य के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो Lovekushchetna@gmail.com पर ईमेल करें।

आप सभी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की हार्दिक बधाई
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस हम सभी के लिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि एक विचार है—एक ऐसा विचार जो हमें जिज्ञासा, तर्क और सत्य की खोज की ओर प्रेरित करता है। 28 फ़रवरी का यह दिन डॉ. सी. वी. रमन की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने “रमन प्रभाव” की खोज कर भारत को विश्व वैज्ञानिक मानचित्र पर गौरवान्वित किया। यह दिन हमें याद दिलाता है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) का विकास मानव जाति के समग्र विकास के लिए कितना आवश्यक है। जब समाज प्रश्न पूछता है, प्रमाण खोजता है और अंधविश्वास से ऊपर उठकर सोचता है, तभी वास्तविक प्रगति संभव होती है।
भारत की धरती सदैव महान वैज्ञानिकों की कर्मभूमि रही है। डॉ. सी. वी. रमन, जिनकी खोज ने प्रकाश के नए आयाम खोले, और डॉ. एस. चंद्रशेखर, जिन्होंने ब्रह्मांड की गहराइयों को समझने में अमूल्य योगदान दिया—ऐसे अनेक भारतीय वैज्ञानिक हमारे लिए गर्व का विषय हैं। इनके साथ-साथ होमी भाभा, विक्रम साराभाई, ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, मेघनाद साहा, एसएन बसु, जेसी बोस जैसे असंख्य वैज्ञानिकों ने भारत की वैज्ञानिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया।
फिर भी, हमें आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। 140 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले देश के रूप में हमारे पास अपार प्रतिभा है, लेकिन नोबेल पुरस्कार जैसे वैश्विक सम्मान अब भी अपेक्षाकृत कम हैं। यह हमें संकेत देता है कि हमें अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक शिक्षा में और अधिक निवेश, सहयोग और अवसरों की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 का विषय “Women in Science: Catalyzing Viksit Bharat” हमें यह याद दिलाता है कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को समान अवसर और सम्मान मिलेगा।
"विज्ञान तब ही पूर्ण होगा जब उसमें समाज के हर वर्ग की आवाज़ शामिल होगी।"
आइए, इस राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर हम संकल्प लें कि हम जिज्ञासु बनेंगे, प्रमाण आधारित सोच को अपनाएँगे और विज्ञान को केवल विषय नहीं, बल्कि जीवन शैली बनाएँगे।
"यही वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानवता को एक बेहतर, तार्किक और प्रगतिशील भविष्य की ओर ले जाएगा।"
जय विज्ञान!
- सुमित पाण्डेय
सुमित जी शिवालिक चिल्ड्रेन साइन्स फ़ाउंडेशन मे एक कुशल विज्ञान मित्र हैं जो अपनी टीम के साथ अपने वर्कशॉप्स, चर्चा और प्रयोगों द्वारा विद्यालयों के बच्चों मे वैज्ञानिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के सराहनीय प्रयास करते हैं |
https://www.youtube.com/@ShivalikScienceFoundation
https://www.facebook.com/p/Shivalik-children-science-foundation-100075990884854/
अभी, एक बेहतरीन अभिनेता al pacino के बेस्ट सीन देख रहा था, एक दृश्य देखा और इतना प्रभावित हुआ कि तुरंत एक लेख लिखने लगा, एक जरूरी लेख।
लिंक लेख के अंत में;
लेख पर आते हैं, हम ज्यादातर हालातों में इस काबिल जरूर होते हैं कि अपने से किसी कमजोर की मदद कर सकें, और इससे जो आनंद और गर्व की अनुभूति होती है वो अप्रतिम होती है।
हम कई बार शिकायत करते हैं कि हमें दुनिया से यह नहीं मिला, वह नहीं मिला लेकिन क्या साथ में हम यह भी सोचते हैं कि हम अपने से छोटों या less privileged लोगों के लिए कुछ करके एक मिशाल पेश कर रहे हैं?
हम समाज में सच्चाई, ईमानदारी और भलमानसानियत की उम्मीद करते हैं, क्या आपको पता है कि इनकी रक्षा करनी होती है, इन्हें संरक्षण देना होता है तब ही ये मजबूत होकर दूसरों की रक्षा के लायक बन पाते हैं।
इसीलिए मेरा मेरे सुधी पाठकों से आग्रह है, जब भी अवसर मिले, ऐसे प्रयास करें कि सत्य की रक्षा हो और ईमानदारी को संरक्षण मिले।
आज अगर आपके पास संसाधन हैं, ताकत है तो उससे ईमानदारी को बल दें, अपने काम से प्यार करने वालों को प्रोत्साहित करने में लगाएं ताकि कल जब बूढ़े हों तब ये न कहना पड़े कि काम से प्यार करने वाले और ईमानदार लोग इतने कम क्यों हैं ? जब तक आपके पास ताकत है उससे सही चीजों को संरक्षण दें, उन्हें बल दें।
लिंक - https://youtu.be/Jd10x8LiuBc?si=As-rK9Rilah8atQZ
आज सरकारी सेवा में मेरे सीनियर आदरणीय संदीप यादव सर का जन्मदिन है, जितना उनको जाना, अपने सहकर्मियों के लिए मददगार और एक स्वस्थ माहौल का पोषक, परस्पर हितों और परस्पर सम्मान का हिमायती पाया, अतः यह लेख हम सबके प्रिय संदीप सर को समर्पित।
सभी पाठकों को शुभकामनाएं
-लवकुश कुमार