
यह मेरे लिए खुशी की बात है कि जिस पुस्तक के लिए, इतने महीनो से प्रयास चल रहा था वह अब पाठकों के लिए उपलब्ध हो गई है, कुछ आम सवालों के जवाब, परिचय और आपकी प्रतिक्रिया के लिए यह लेख | ईमेल - KCPHYQA@GMAIL.COM
सवाल जैसे कि
लेखक का परिचय जरूरी है और प्रासंगिक भी, पुस्तक की सामग्री के आंकलन में
ये किताब क्यों खरीदें, अन्य किताबों से यह किस तरह अलग हो सकती है? कुछ बातें इस पर :
स्टूडेंट्स के लिए है अतः स्टूडेंट्स की कुछ समस्याएँ जिन्हें संबोधित किया गया है :
कुछ बातें जिनके चलते इस पुस्तक को लिखने की जरुरत पड़ी:
कुछ ही दिनों में यह पुस्तक अमेज़न और फ्लिप्कार्ट पर उपलब्ध होगी, अपने जानने वाले विद्यार्थियों को गिफ्ट करने के लिए एक एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है यह पुस्तक, जो न केवल उनके पढ़ने के तरीके को बेहतर करेगी बल्कि उन्हें एक अवलोकन और एनालिसिस की दृष्टि देगी| इसे निम्नलिखित लिंक से खरीदा जा सकता है| https://notionpress.com/in/read/ok-physics-tips-aur-tareeke, या बिना डिलीवरी शुल्क के प्राप्त करने के लिए अपने निकटतम पुस्तक विक्रेता द्वारा डिमांड (वितरक को) सबमिट करवाएं (पुस्तक के लिए अपने पते का फॉर्म भरें )

सभी प्यारे विद्यार्थियों से एक बात—अपने विषय में आने वाली कठिनाइयों से जूझना सीखिए। किसी प्रश्न का उत्तर या समाधान तुरंत कहीं से खोज लेने की आदत मत डालिए। ऐसा करने से आपकी सोचने-समझने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है। अपना अधिक समय मूल अवधारणाओं (Concepts) को स्पष्ट करने में लगाइए। जब आपकी नींव मजबूत होगी, तब आप सबसे कठिन अवधारणाओं को भी समझ पाएँगे और जटिल से जटिल प्रश्नों का समाधान भी स्वयं कर सकेंगे।
इस संदर्भ में अब्राहम लिंकन का एक प्रसिद्ध कथन याद आता है—"यदि मुझे किसी पेड़ को काटने के लिए छह घंटे दिए जाएँ, तो मैं पहले चार घंटे अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज करने में लगाऊँगा।" यही सिद्धांत पढ़ाई पर भी लागू होता है। अवधारणाओं को मजबूत करना ही अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज करना है।
अक्सर ऐसा होता है कि कोई विद्यार्थी किसी कठिन प्रश्न से लंबे समय तक जूझता रहता है, फिर भी उसका समाधान नहीं निकाल पाता। तब उसे स्वयं या उसके माता-पिता को लगता है कि उसका समय व्यर्थ चला गया। वास्तव में ऐसा नहीं होता। भले ही उस एक प्रश्न का उत्तर न मिला हो, लेकिन उस संघर्ष के दौरान अनेक संबंधित अवधारणाएँ उसके मन में स्पष्ट हो चुकी होती हैं। यही बौद्धिक विकास की वास्तविक प्रक्रिया है।
एक दार्शनिक के बारे में कहा गया है कि "दार्शनिक वह अंधा व्यक्ति है जो अँधेरे कमरे में काली बिल्ली को खोजता रहता है।" परंतु विद्यार्थी की स्थिति तो इससे कहीं बेहतर है। उसकी आँखें खुली हैं, चारों ओर ज्ञान का प्रकाश फैला हुआ है और उसके पास सीखने की इच्छा भी है। ऐसे में यदि वह धैर्य और निरंतर प्रयास बनाए रखे, तो वह किसी भी अवधारणा रूपी 'काली बिल्ली' को अवश्य खोज लेगा।
इसलिए कठिनाइयों से घबराइए नहीं, उनसे मित्रता कीजिए।
हर संघर्ष आपको केवल एक प्रश्न का उत्तर नहीं देता, बल्कि सोचने की क्षमता, धैर्य और आत्मविश्वास भी देता है। यही गुण जीवन भर आपकी सबसे बड़ी पूँजी बनेंगे।
- भुवन पंत "इत्यादि"
लगभग ढाई दशकों तक भौतिक विज्ञान के एक शीर्ष संस्थान का नेतृत्व करते हुए, भौतिक विज्ञान में परास्नातक आदरणीय भुवन पंत सर ने सैकड़ों युवाओं को देश-विदेश के नामचीन इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों तक पहुँचाया। पिछले तीन वर्षों से अध्यापन को विराम देकर वे अपना पूरा समय रचनात्मक लेखन को दे रहे हैं। उनकी व्यंग्य रचनाएँ समाज के विविध रंगों, विरोधाभासों और विडंबनाओं को तीक्ष्ण किंतु सहज शैली में प्रस्तुत करती हैं।

HC Verma (HCV) सर की कुछ बातें
प्यारे विद्यार्थियों आपने वर्मा सर का नाम जरूर सुना होगा और अगर नहीं सुना है तो उनके बारे में अपने शिक्षक से बात करें या इन्टरनेट का सहारा लें|
वाह देश के जाने माने भौतिक विज्ञानी और आई आई टी कानपुर में भौतिकी के प्रोफेसर रहे हैं और सेवा निवृत्ति के बाद भी भौतिकी के क्षेत्र में महती भूमिका निभा रहे हैं, मई 2026 में उत्तराखंड के द्वारहाट के एक विद्यालय में उनसे मिलना और उन्हे सुनना हुआ|
प्रस्तुत हैं कुछ बातें आपके लिए, ज्यादा जानकारी के लिए सर की "बेहतरीन किताब भौतिकी की समझ" पढ़ी जा सकती है और उनके youtube एवं वेबसाइट ( https://hcverma.in/books ) पर विजिट किया जा सकता है|
पूरा लेख पढ़ने के लिए विजिट करें https://kumarchetna.in/article.php?id=917

“बड़े वैज्ञानिक शोध के लिए यदि हम जुझारू शोधार्थियों और बेहतरीन अवसंरचना के लिए उत्कृष्ट इंजीनियरों का पर्याप्त संख्याबल चाहते हैं, तो हमें सुनिश्चित करना होगा कि शुरुआत से ही बच्चों में विज्ञान के प्रति प्रेम पैदा हो, डर नहीं। उसी प्रयास में बतकही के अंदाज में प्रस्तुत है यह पुस्तक।”
अपने ग्रेजुएशन के दिनों से बच्चों को पढ़ाते और मार्गदर्शन करते समय, फिर स्वतंत्र रूप से बच्चों के डाउट्स हल करते हुए मैंने गौर किया कि अलग-अलग स्तर के बच्चों को कई तरह की दिक्कतें आ रही हैं—भौतिकी के सिद्धांत समझने में, आंकिक प्रश्नों को हल करने के लिए सही दिशा (अप्रोच) में आगे बढ़ने में। यहाँ तक कि कई ऐसे छात्र-छात्राएँ मिले जो आंकिक प्रश्नों में दी गई राशियों और प्रतीकों को पहचान पाने में ही सक्षम नहीं हो पाते। जब उन्हें नोटेशन (प्रतीक) ही समझ नहीं आ रहा, तो किस सूत्र को लगाएँ, इसका निर्णय भी बहुत मुश्किल हो जाता है। थोड़ी भिन्नता के साथ एक जैसे दिखने वाले प्रश्नों में कौन-सा सूत्र लगना है, यह नहीं जान पाते। इस तरह की दिक्कतों के साथ कुछ छात्रों से गणना में ही गलतियाँ हो जाती हैं (अभ्यास की कमी के चलते)। इन दिक्कतों का समाधान करने के उद्देश्य से ही “ओके फिजिक्स शृंखला” की पुस्तकों में सही प्रक्रिया को ध्यान में रखकर कई स्तर के प्रश्न और समुचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।
बाजार में मौजूद पुस्तकों को पढ़कर ऐसा लगता है कि उन पुस्तकों को लिखते समय यह धारणा मन में रही है कि पाठक/विद्यार्थी दसवीं में बहुत अच्छे होंगे। जबकि वास्तविकता यह है कि कई कारणों—व्यक्तिगत दिक्कतों, शिक्षण या अभ्यास की अपर्याप्तता—के चलते बहुत से विद्यार्थियों का दसवीं का आधार ही गड़बड़ हो जाता है या कमजोर रह जाता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक की सामग्री इस तरह निर्मित की गई है कि वे विद्यार्थी जिनका हाई स्कूल अच्छा नहीं रहा, या फिर भौतिकी में अपेक्षाकृत कमजोर रह गए, या जिन्हें भौतिकी से डर लगता है, उन्हें भी भौतिकी में दिक्कत न आए। वे सैद्धांतिक के साथ-साथ आंकिक प्रश्नों में भी माहिर हो सकें, जिससे बोर्ड में तो अच्छा कर पाएँगे ही, प्रतियोगी परीक्षाओं में ज्यादा सवाल हल करके बेहतर प्रदर्शन कर पाएँगे और विज्ञान/तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ पाएँगे।
बाजार में पहले ही भौतिकी पर बहुत सी किताबें हैं, जिनमें छोटे-से-छोटे टॉपिक पर लेख हैं और अभ्यास के लिए प्रश्नावली भी हैं। लेकिन कुछ कमी जरूर है, जो छात्रों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों से परिलक्षित होती है। मेरे अपने कुछ साल के chegg.com और toppr.com जैसे प्लेटफॉर्म के लिए “सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट, कंटेंट राइटर” के काम के साथ, अपने शिक्षक बन चुके साथियों के फीडबैक से जाना कि काफी छात्र ऐसे हैं जो भौतिकी को समझने के बजाय रटने वाला विषय मानते हैं। नतीजा यह होता है कि नए सवाल, जिनमें सोचने और तर्क की जरूरत होती है, उनसे नहीं हो पाते। काफी बच्चे तो गणित की मामूली बारीकियों से अनभिज्ञ रहने के चलते अपनी डॉक्टर या इंजीनियर बनने की इच्छा पूरी नहीं कर पाते, क्योंकि भौतिकी के मूलभूत आंकिक प्रश्न भी हल नहीं कर पाते।
समाधान के एक प्रयास के रूप में इस पुस्तक को लिखा गया है, जिसमें कई टिप्स और तरीकों पर बात हुई है, विश्लेषण क्षमता बढ़ाने पर बात हुई है, किसी भी अध्याय/टॉपिक के मूलभूत बिंदुओं को पकड़ने पर बात हुई है। इससे पाठक भौतिकी के तार्किक प्रश्नों को भी स्टेप-बाय-स्टेप हल करना सीख पाएँगे और आंकिक प्रश्न भी—वे कितने भी नए क्यों न हों—हल कर पाएँगे। साथ ही वे वे तरीके भी सीख/समझ पाएँगे, जिनसे तथ्य, सूत्र या अवधारणा याद रखना और समझना आसान हो।
यह पुस्तक उनको भी मदद करेगी जिन्हें भौतिकी से डर लगता है और उन्हें भी जो भौतिकी से दोस्ती करके, इससे संवाद करके अपने डॉक्टर/वैज्ञानिक या इंजीनियर बनने का सपना पूरा करना चाहते हैं। बायो स्ट्रीम के वे छात्र जो केवल गणित में हाथ तंग होने के चलते फिजिक्स में स्कोर नहीं कर पाते, उनके लिए इस पुस्तक में कुछ सामग्री शामिल करने का प्रयास किया गया है, ताकि डर दोस्ती में तब्दील हो सके।
यह किताब पाठ्यपुस्तक नहीं है और न उसका विकल्प। यह तो एक निर्देशिका है, आपको यह बताने की कि फिजिक्स बेहतर तरीके से कैसे पढ़ सकते हैं। आपके सिलेबस के ही टॉपिक्स, सूत्र, प्रश्न और आंकिक प्रश्नों को आधार बनाकर इस किताब में सवाल भी हैं, लेकिन इतनी संख्या में नहीं कि आपको देखकर ही हिम्मत जुटानी पड़े। जो भी सवाल हैं, उनके स्टेप-बाय-स्टेप हल हैं, पीछे की बारीकियों के साथ जिक्र भी है। इस किताब को इस तरह लिखा गया है ताकि छात्रों को लगे कि बड़ा भाई या बहन या कोई बड़ा, कोई प्यारा शिक्षक पास में बैठकर समझा रहा हो। छात्रों के मन में उठने वाली बहुत सी जिज्ञासाओं और भ्रमों को पहले ही संबोधित किया गया है, ताकि पाठक को ऐसा लगे कि जैसे यह किताब उसी के लिए लिखी गई है।
अगर विस्तार से कहें तो ओके फिजिक्स शृंखला के उद्देश्य में निम्नलिखित समस्याओं/दिक्कतों को संबोधित करने का प्रयास शामिल है—
पुनः इस बात को रेखांकित करता हूँ कि मेरी पुस्तकों का उद्देश्य केवल भौतिकी सीखाना/समझना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में Analytical and Reasoning-Based Approach विकसित करना है। यह अप्रोच आ जाने पर कोई भी नया टॉपिक समझना और सीखना आसान हो जाता है। इसीलिए बहुत से संख्यात्मक (Numerical) प्रश्नों से पुस्तक भरने के बजाय चुनिंदा प्रश्न शामिल किए गए हैं, लेकिन विस्तृत (स्टेप-बाय-स्टेप) हल के साथ, ताकि समझ स्पष्ट हो सके।
यह पुस्तक पाठ्यक्रम (Curriculum) पूरा कराने के लिए नहीं, बल्कि भौतिकी को समझने (Understanding) के लिए लिखी गई है। विद्यार्थियों में समझ (Comprehension) विकसित करना इसका उद्देश्य है। इसलिए इसमें वही विषय और उदाहरण शामिल किए गए हैं जो विद्यार्थियों की सोचने की क्षमता को विकसित करें और उन्हें नए प्रश्नों को स्वयं हल करने योग्य बनाएँ।
मेरा मानना है कि विश्लेषणात्मक (Analytical) और तर्कपूर्ण (Reasoning-Based) सोच विकसित हो जाने और सही दिशा मिल जाने पर विद्यार्थी काफी कुछ स्वयं भी समझने लगते हैं।
यदि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद विद्यार्थी अपने विद्यालय या प्रतियोगी परीक्षा की किसी भी पुस्तक को अधिक आत्मविश्वास और समझ के साथ पढ़ने लगें, तो यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी।
मैं अपने उद्देश्य में कितना सफल रहा, यह आप पाठकों की प्रतिक्रिया से ही जान पाऊँगा। आपकी फिजिक्स बेहतर हो, इसी आशा के साथ ढेरों शुभकामनाएँ।
“कोई सवाल हो या हो डाउट, जरूर साझा करें”
ईमेल— KCPHYQA@gmail.com अथवा
वेब— kumarChetna.in/physics

क्या आपको भी दरकार है उन टिप्स की जिनसे आप भौतिकी के साथ सहज हो सकें ताकि इससे डरने के बजाय, इससे दोस्ती कर इसे आसानी से समझ सकें ?
फिर यह किताब आपके लिए है|
यह पुस्तक पाठ्यपुस्तक नहीं है और न ही उसका विकल्प। यह एक सहायक पुस्तक है जो इस प्रयास के साथ लिखी गई है कि आपके लिए भौतिकी को समझना और उसके साथ सहज होना आसान हो सके, ताकि नए प्रश्नों को अप्रोच कर उन्हें हल करना भी आसान हो सके। इससे आप परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें और भौतिकी को आगे अपने विषय के रूप में लेकर चलने के लिए कॉन्फिडेंट हो सकें।
इस प्रयास के अंतर्गत मैंने अपने उन तरीकों और अप्रोच को साझा किया है, जो मेरी पढ़ाई के दौरान काम आए। साथ ही उन डाउट्स और दिक्कतों पर भी बात की गई है तथा उनके समाधान दिए गए हैं, जिनका सामना अक्सर विद्यार्थी करते हैं।
इस पुस्तक की तुलना पाठ्यपुस्तक से न की जाए। इससे अधिकतम लाभ लेने के लिए इसमें दिए गए उदाहरणों को समझते हुए अपने अंदर एक तार्किक अप्रोच विकसित करें, ताकि वह अप्रोच न केवल उस प्रश्न में, बल्कि अन्य प्रश्नों में भी काम आए।
इस पुस्तक में चुनिंदा उदाहरणों, टॉपिक्स और प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों में तार्किक अप्रोच विकसित करने का प्रयास किया गया है। साथ ही कुछ सीमित प्रश्न भी दिए गए हैं, जो उन्हें इस बात के लिए अभ्यस्त करेंगे कि किसी भी पाठ को किस तरह विभिन्न प्रश्न-शृंखलाओं में तोड़कर आसानी से पढ़ा जा सकता है। एक बार यह तरीका आदत में आ गया, तो कितने भी पाठ आसानी से पढ़े और समझे जा सकते हैं।
ज्यादा-से-ज्यादा टॉपिक कवर करने के बजाय, इस पुस्तक में चुनिंदा टॉपिक्स के विभिन्न पहलुओं पर बात करने का प्रयास किया गया है। इससे विद्यार्थियों में वह दृष्टि विकसित हो सके कि वे प्रश्न पढ़ते ही उसमें छिपे इशारे और दिए गए मानों को प्रासंगिक राशियों से जोड़कर देख सकें तथा उसे हल करने के लिए सही सूत्र या कॉन्सेप्ट की पहचान कर सकें। एक बार यह दृष्टि विकसित हो जाए, तो अलग-अलग टॉपिक्स के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। वे भी आसान लगने लगेंगे। जैसे आप देखते होंगे कि कुछ विद्यार्थियों के लिए कोई भी विषय या टॉपिक मुश्किल नहीं लगता — सारा कमाल अप्रोच (तरीके) और एनालिटिकल विजन का होता है।
पुस्तक के साहित्यिक अंश में व्यक्त विचार लेखक के अपने(व्यक्तिगत) विचार हैं, इन्हे किसी(उनके) विभाग या संगठन के विचार न माना जाए| साथ ही पुस्तक के लेखन और प्रकाशन में यथासंभव सावधानी बरती गयी है फिर भी यदि कोई त्रुटि छूट गयी हो तब उस अवस्था में उस त्रुटि के कारण पाठक को होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति की ज़िम्मेदारी लेखक या प्रकाशक की नहीं होगी|
विश्वास है कि पुस्तक में जो कुछ भी मैं अपने अध्ययन के तरीकों से शामिल कर सका हूँ, आप उसका अधिकतम लाभ उठाएँगे। क्या नहीं मिला, इसके आक्षेप के बजाय जो कुछ भी आपको दे सका हूँ, उसे सराहेंगे, इस्तेमाल करेंगे और अपने दोस्तों से साझा करेंगे, ताकि वे भी सीखने के अनुभव को बेहतर बना सकें और खुशी से आपसे मुस्कुराकर बात कर सकें।
आपको बहुत कुछ देने का मन है, जो आपके काम आएगा और आपको और अधिक मजबूत तथा कॉन्फिडेंट बनाएगा। लेकिन फिलहाल इतना ही शामिल कर सका हूँ। बाकी फिर कभी — या तो इसी पुस्तक के अगले संस्करण में या किसी अन्य पुस्तक में। तब तक यदि कोई कमी लगे तो लिख भेजें। फिलहाल जो कुछ इस पुस्तक में शामिल किया जा सका है, उसका अधिकतम उपयोग करते हुए अपने सपनों और सीखने की दुनिया में उन्नति करें।
बढ़िया किया जो यह किताब खरीद ली! अब अच्छे से जाना जा सकता है कि विज्ञान की कोई किताब ऐसी भी हो सकती है। चलो, फिर मुलाकात करवाते हैं भौतिकी के अध्यायों से — पहले मुलाकात, फिर बात, फिर कुछ वक्त का साथ और आखिर में दोस्ती।
ठीक है न?
शुभकामनाएं
आपका
लवकुश कुमार


