Explore the books by author for excelling in your discipline.
Read NowExplore for "promotable images/quotes" at your social media for a better society.
Read Now
अगर आपको भी लगता है कि हमारे आसपास की चीज़ें बहुत ज़्यादा एक जैसी होती जा रही हैं—वही विचार, वही तरीके, वही पसंद और वही तरह के काम—तो एक सवाल स्वाभाविक है:
आख़िर रचनात्मकता या कुछ नया करने की कोशिश हमें इतनी कम क्यों दिखाई देती है?
इसका एक कारण शायद यह है कि हम बतौर इंसान भीड़ में रहना सुरक्षित महसूस करते हैं। वही काम करना आसान लगता है, जो दूसरे कर रहे हैं। जिस रास्ते पर पहले से लोग चल रहे हों, वहाँ जोखिम कम महसूस होता है और समाज से validation भी जल्दी मिल जाता है।
इसके उलट, कुछ नया करने का मतलब अक्सर अनिश्चितता को स्वीकार करना होता है। आपको यह भी पता नहीं होता कि लोग आपके विचार को समझेंगे या नहीं, पसंद करेंगे या उसका मज़ाक उड़ाएँगे।
विडंबना यह है कि इसकी शुरुआत कई बार समाज से भी पहले हमारे अपने परिवारों से होती है। अगर परिवार में कोई व्यक्ति सामान्य रास्ते से अलग कुछ करने लगे, तो उसे प्रोत्साहित करने के बजाय अक्सर सवाल, संदेह या मज़ाक का सामना करना पड़ता है—
“इससे क्या मिलेगा?”
“लोग क्या कहेंगे?”
“सब यही कर रहे हैं, तुम भी वही करो।”
शायद इसी वजह से बहुत-से नए विचार जन्म लेने से पहले ही दब जाते हैं।
रचनात्मकता केवल प्रतिभा का मामला नहीं है। इसके लिए अलग सोचने की आज़ादी, असफल होने की गुंजाइश और थोड़ी-सी सामाजिक असहमति सहने का साहस भी चाहिए।
और शायद इसी कारण रचनात्मक लोग कम नहीं होते—बस उनमें से बहुत-से लोग अपनी रचनात्मकता को सुरक्षित रहने के लिए छिपा लेते हैं।
-लवकुश कुमार
लेखक भौतिकी में परास्नातक हैं और अपने कार्यालयी दायित्व से इत्तर संवेदनशीलता के प्रवाह हेतु साहित्य के प्रचार प्रसार हेतु प्रयासरत हैं|
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना अपने जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट। वेबसाइट के उद्देश्य के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो kumarchetnapsw@gmail.com पर ईमेल करें।
इस स्वतंत्रता दिवस पढ़िए, कुछ अलग और विचार कीजिए कि आप किस तरह योगदान कर रहे हमारे देश की स्वतंत्रता को बनाए रखने में। और हां क्या आपको पता है कि हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम के आदर्श क्या हैं ? अगर नहीं तो पढ़ें।
आइये संवेदनशील कवि संजय सर की कविता से मुलाकात करते हैं:
गुमनाम शहीद
गुमनाम शहीदों को मेरा सलाम भेजना,
अनजान मसीहों को मेरा सलाम भेजना,
उनकी शहादतों के क्या हैं मायने रहे,
हासिल हुए हैं जो उन्हें मुकाम भेजना।
गुमनाम शहीदों को मेरा सलाम भेजना……….
ए वक़्त तू गवाह शहादत के दौर का,
सो तू ही उनसे मिलके ये पैग़ाम भेजना,
उनकी वतन परस्ती से ये देश है कामिल,
जो चाहता है आज वो हो जाता है हासिल,
उनकी ही वफ़ाएँ हैं की ये गुलिस्ताँ बना,
इसकी महक के उनको तू गुलफाम भेजना।
गुमनाम शहीदों को मेरा सलाम भेजना……….
ना हमको याद है, ना ज़माने को याद है,
कुछ नाम जिनसे सज रहा ये माहताब है,
मौजूद हैं तुझमें वो नाम आज भी कहीं,
ए हवा हमको भी ज़रा वो नाम भेजना।
गुमनाम शहीदों को मेरा सलाम भेजना……….
अपनी किताब में सभी वो नाम लिखेंगे,
भूली हुई वो दास्ताँ भी याद करेंगे,
जी लेंगे हम भी दर्द वो,वो परेशानियां,
गुमनाम ए वफ़ा को दिल से दाद करेंगे,
ए वक़्त, ए हवा, ए चाँद सितारों,
वो याद हैं हमें सदा ये कह के बहारों,
मेरी सुबह, मेरे दिन-ओ-शाम भेजना,
लिख के यहाँ लाया हूँ शहीदों की याद में,
गुमनाम शहीदों को मेरा क़लाम भेजना ।
गुमनाम शहीदों को मेरा सलाम भेजना……….
- संजय सिंह 'अवध'
ईमेल- green2main@yahoo.co.in
उक्त मन को छूने वाली कविता के रचयिता भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण में ATC अधिकारी हैं और अपने कालेज के दिनों से ही, जैसा कि इनकी रचनाओं से घोतक है, जन जन में संवेदना, करूणा और साहस भरने के साथ अंतर्विषयक समझ द्वारा उत्कृष्टता के पथ पर युवाओं को अग्रसर करने को प्रयासरत हैं।
कवि के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें।
प्रिय बच्चों क्या आप अल्मोड़ा गए हैं कभी?, हाँ वही अल्मोड़ा जो अपने देश भारत के उत्तराखंड राज्य के हिमालय की खूबसूरत वादियों में है ? आओ वहाँ की कुछ बातें की जाएँ ताकि जब आपका वहाँ जाना हो तो आप एक बेहतरीन स्थान पर जाने से चूक न जाएँ:
अल्मोड़ा की वादियाँ और खूबसूरत लोकेशन पर स्थित भव्य मानसखंड विज्ञान केंद्र, पहली बार मुझे मई 2026 में सोमेश्वर जाते वक़्त दिखा तो बहुत खुशी हुयी कि अल्मोड़ा जैसी सुदूर जगह भी विज्ञान केंद्र है, अब तो राजधानी देहारादून तक दूरी तय करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी और उसी दिन सोच लिया कि बेटे पार्थ को घुमाना है एक दिन और वह दिन जल्दी ही आ गया बीती जून 2026 को बेटे पार्थ के साथ सपरिवार मानसखंड विज्ञान केंद्र, भ्रमण हेतु जाना हुआ और यह भ्रमण हम सबके लिए यादगार रहा, चाहे हवा के दबाव संबंधी मॉडल हों, ग्रेविटी का प्रयोग हो, पर्यावरण संकट को लेकर प्रदर्शनी हो, मानव शरीर की वात, पित्त, कफ को लेकर मैम का प्रेजेंटेशन हो या हो तारामंडल, माहौल और मॉडल इतने ध्यान खींचने वाले थे कि 3 घंटे कब बीत गए पता ही नहीं चला, और बेटा पार्थ फिर कह रहा है कि दुबारा जाना है मानसखंड, फिर से देखने हैं वही चकित कर देने वाले मॉडल्स, तो आइए और डीटेल में बात करते हैं मेरे अनुभव और इस बात पर कि आपको भी क्यों जाना चाहिए वहाँ भ्रमण के लिए:

बच्चों आज के समय में विज्ञान केवल पुस्तकों के पन्नों तक सीमित विषय नहीं है। वास्तविक विज्ञान वह है जिसे देखा जाए, छुआ जाए, प्रयोगों के माध्यम से समझा जाए और जीवन से जोड़ा जाए। इसी सोच को साकार करता है मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)। यह केंद्र विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं तथा आम नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और विज्ञान को रोचक, सुलभ एवं अनुभवात्मक बनाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
आप सोच रहे होंगे कि यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या है ? इससे पहले की आपको आगे की यात्रा पर ले चलूँ, आओ बताए देता हूँ :
इसका मतलब ये है कि हमारे आस पास जो कुछ भी होता है उसमें कुछ भी अकारण नहीं होता है, हर घटना के पीछे कुछ न कुछ न कुछ कारण होता है जैसे कि
ऐसे ही बहुत सी बाते हैं, वो फिर कभी, फिल हाल इतना समझो कि दुनिया मे कुछ भी हो रहा तो उसके पीछे कुछ कारण होगा, ऐसा सोचना ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण है|
मानसखंड विज्ञान केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी इंटरैक्टिव विज्ञान प्रदर्शनी है। यहाँ प्रदर्शित मॉडल केवल देखने के लिए नहीं हैं, बल्कि उन्हें स्वयं संचालित करके विज्ञान के सिद्धांतों को समझा जा सकता है। जब विद्यार्थी किसी वैज्ञानिक सिद्धांत को अपनी आँखों से घटित होते देखते हैं, तब सीखना अधिक प्रभावी और स्थायी बन जाता है। एक लिंक दे रहा हूँ, वहां से कुछ विडियो आप देख सकते हैं, बाकि तो आपको वहां जाकर ही देखना चाहिए| youtube पर ढूंढें kumarchetna psw (https://www.youtube.com/@kumarCHETNAPSW) या फिर इस चैनल से भी कुछ विडियो देख सकते हैं - https://www.youtube.com/@Uttarakhandkibaatein
केंद्र में जलवायु परिवर्तन पर आधारित इंटरैक्टिव प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र है। वर्तमान समय में बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों के पिघलने, चरम मौसमी घटनाओं और पर्यावरणीय चुनौतियों के संदर्भ में यह प्रदर्शनी बच्चों और युवाओं को जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक कारणों तथा उसके प्रभावों को सरल भाषा में समझने का अवसर प्रदान करती है। यह केवल जानकारी नहीं देती, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित करती है।
आप सोच रहे होंगे की ये चरम मौसमी घटनाएं क्या हैं, बस अभी बता रहा हूँ, उदाहरण से समझो- ओले गिरना, बहुत ज्यादा बर्फबारी, हीटवेव (लू चलना अर्थात समय से अधिक गर्म हवाएं चलना), कोल्डवेव (शीतलहर) तूफ़ान (चक्रवात) आना, बिजली गिरना, छोटी सी जगह में कम समय में ही ढेर सारा पानी बरस जाना (बाल फटना) आदि चरम मौसमी घटनाएं कहलाती हैं|
भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, जीवविज्ञान तथा पृथ्वी विज्ञान जैसे विषयों पर आधारित मौलिक विज्ञान प्रदर्शनी विद्यार्थियों की जिज्ञासा को नई दिशा देती है। अनेक वैज्ञानिक सिद्धांत, जिन्हें कक्षा में केवल सूत्रों या परिभाषाओं के रूप में पढ़ाया जाता है, यहाँ जीवंत मॉडलों के माध्यम से सहज रूप से समझ में आते हैं।
इससे गणित और विज्ञान समझना भी आसान होता है|
मानसखंड विज्ञान केंद्र का विज्ञान उद्यान (Science Park) बच्चों और युवाओं के लिए खुली प्रयोगशाला जैसा है। यहाँ स्थापित वैज्ञानिक उपकरण और मॉडल खेल-खेल में गुरुत्वाकर्षण, ध्वनि, प्रकाश, गति, ऊर्जा तथा अन्य वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने में सहायता करते हैं। यह विज्ञान को आनंददायक बनाता है और जिज्ञासा को प्रोत्साहित करता है।



आज की शिक्षा केवल जानकारी प्राप्त करने तक सीमित नहीं रह सकती; उसे नई खोजों और समस्याओं के समाधान की दिशा में भी प्रेरित करना चाहिए। इसी उद्देश्य से केंद्र में नवाचार संवर्धन केंद्र (Innovation Nourishment Centre) की स्थापना की गई है। यहाँ विद्यार्थी अपने वैज्ञानिक विचारों को विकसित कर सकते हैं, मॉडल बना सकते हैं तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सृजनात्मक सोच को आगे बढ़ा सकते हैं।
गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा के लिए केवल विद्यार्थियों का उत्साही होना पर्याप्त नहीं है; शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण भी उतना ही जरुरी है। मानसखंड विज्ञान केंद्र में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए विज्ञान गतिविधियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रयोग-आधारित शिक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा नवीन शिक्षण विधियों को बढ़ावा दिया जाता है।
विज्ञान तभी सार्थक होता है जब वह समाज से जुड़ता है। केंद्र का सभागार (Auditorium) वैज्ञानिकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराता है। यहाँ आयोजित व्याख्यान, चर्चाएँ, कार्यशालाएँ और विज्ञान संवाद लोगों को वैज्ञानिक सोच विकसित करने तथा समसामयिक वैज्ञानिक विषयों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
मानसखंड विज्ञान केंद्र केवल अपने परिसर तक सीमित नहीं है। इसके आउटरीच कार्यक्रम विद्यालयों, ग्रामीण क्षेत्रों तथा दूरस्थ स्थानों तक विज्ञान शिक्षा पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। विज्ञान प्रदर्शनियाँ, विज्ञान मेले, कार्यशालाएँ और जन-जागरूकता कार्यक्रम विज्ञान को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 अनुभवात्मक शिक्षा, जिज्ञासा-आधारित अधिगम तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास पर विशेष बल देती है। मानसखंड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा इन उद्देश्यों को व्यवहार में उतारने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह केवल एक विज्ञान संग्रहालय नहीं, बल्कि ऐसा प्रेरणादायी शिक्षण केंद्र है जहाँ विज्ञान को देखा, समझा, अनुभव किया और जीवन से जोड़ा जा सकता है।
यदि हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी प्रश्न पूछे, तर्क करे, प्रयोग करे और समाज की चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान खोजे, तो ऐसे विज्ञान केंद्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा विज्ञान प्रेमियों के लिए मानसखंड विज्ञान केंद्र निश्चित रूप से एक प्रेरणास्पद गंतव्य है।
केंद्र में तैनात सभी उत्साही स्टाफ एवं केंद्र के निदेशक महोदय के प्रति अपना भार व्यक्त करता हूँ|
धन्यवाद
लवकुश कुमार
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो kumarchetnapsw@gmail.com पर ईमेल करें।

बीते रविवार (02/08/2026 ) हम सबके सामूहिक प्रयास और वरिष्ठजनों के प्रोत्साहन से 22वीं साप्ताहिक पुस्तक परिचर्चा का ऑनलाइन आयोजन सफल रहा, जिसमें निम्नलिखित पुस्तकों पर सार्थक चर्चा हुयी:
अब पहुंची हो तुम – महेश चन्द्र पुनेठा : शिक्षाविद, समाज के अध्येता और साहित्यकार, आदरणीय पुनेठा सर की सामाजिक सरोकारों, मानवीय अहसासों और असंगतियों को लेकर संवेदित करने वाली कविताओं का संग्रह| प्रकाशक – समय साक्ष्य प्रकाशन देहारादून
प्रस्तावक – लवकुश कुमार
101 लघुकथाएँ– डॉ विजय अग्रवाल : हमारे रोज़मर्रा जीवन की छोटी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण घटनाओ पर पूर्व आई ए एस अधिकारी और शिक्षाविद आदरणीय डॉ अग्रवाल सर की बारीक नज़र के अवलोकन पर आधारित स्पष्टता देने वाली और संवेदित करने वाला एक बेहतरीन लघुकथा संग्रह| प्रकाशक – बेनतेन प्रकाशन, भोपाल वेबसाइट- afeias.com
प्रस्तावक – सौम्या गुप्ता मैम
शिक्षा में प्रयोग: अनुभवों की दास्तान – अरविंद गुप्ता (चंद्रकला जोशी- शेखर जोशी स्मृति व्याख्यान -2 ): जाने माने प्रयोगिक विज्ञानी अरविंद गुप्ता सर द्वारा देश दुनिया के विभिन्न वैकल्पिक स्कूलों (परंपरागत स्कूल से अलग) के बारे जानकारी देने वाली और बच्चों के समुचित और अबाधित विकास के लिए जरूरी शैक्षणिक बदलावों पर बात करती एक पढ़ी जाने योग्य पुस्तक| प्रकाशक – नवारुण प्रकाशन, गाजियाबाद , वेबसाइट- arvindguptatoys.com
प्रस्तावक – लवकुश कुमार
कबीरा सोई पीर है- प्रतिभा कटियार : जातीय दंश और समाज में महिलाओं की स्थिति की धरातल की सच्चाई से रूबरू कराता एक बेहतरीन उपन्यास जिसमें बताया गया है कि जिस पर बीतती है वही जानता है कि क्या होता है जातिगत भेदभाव और क्यों एक औरत ही दूसरी औरत की आजादी को बांध देती है| सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते कुछ युवाओं को लेकर लिखा गया एक बेहतरीन उपन्यास|
प्रस्तावक – आरती मैम
अंतस जरा ठहरिए – लवकुश कुमार : इस पुस्तक में युवाओं/किशोरों को ध्यान में रखकर रोज़मर्रा के मामलों को लेकर संवेदित करने वाले और जागरूक करने वाले लेखों का संकलन है और साथ ही अतिथि लेखकों की कविताएं और लेख तथा बेहतरीन पुस्तकों एवं फिल्मों की सूची, पाठकों को एक जिम्मेदार, साहसी और संवेदनशील इंसान बनने में मदद कर सकती है|
प्रकाशक – notion प्रकाशन चेन्नई के प्लैटफ़ार्म पर स्व प्रकाशन
प्रस्तावक – अवनीश त्रिपाठी जी, राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं शोध संस्थान
मेरी दोस्त हवा- आचार्य प्रशांत
स्वच्छ हवा की महत्ता, इसके प्रदूषण के कारण और दुष्परिणामों को रेखांकित एक बेहतरीन सचित्र बाल कविता|
प्रस्तावक – पार्थ कुमार

उक्त परिचर्चा में निम्नलिखित पुस्तकसाथी शामिल रहे:
सौम्या मैम, अवनीश त्रिपाठी जी, आरती मैम, गायत्री जायसवाल, उमा मैम, उर्मिला जायसवाल, पार्थ कुमार और लवकुश कुमार |
जिनके द्वारा मुख्यतः निम्नलिखित बिन्दुओं/विषयों/रचनाओं पर बात रखी गयी:
सौम्या मैम :
अवनीश त्रिपाठी जी:
उम्र भर ख्याली भूतों से अगर मैं न डरता,
खुदा! मै क्या ज़ोर से जीता,
खुदा! मैं क्या चैन से मरता!”

आरती मैम:
पार्थ कुमार:
कई बाल कविताओं (खासकर आचार्य प्रशांत द्वारा लिखित, “मेरी दोस्त हवा” ) का पाठ किया और कुछ कहानियों का वाचन भी किया, जो सभी पुस्तक साथियों के लिए रोचक रहा और यह बात भी साबित हुयी कि बच्चों के पास कहने के लिए बहुत कुछ है बशर्ते आपके पास सुनने के लिए समय हो|

लवकुश कुमार (परिचर्चा समन्वयक):
किस मिट्टी के बने हैं पिताजी
कितना खतरनाक है

पुस्तक परिचर्चा मे शामिल सभी पुस्तक साथियों (Bookmates) ने पुस्तक परिचर्चा मे शामिल होकर/अभिव्यक्ति/सराहना/भागीदारी के माध्यम से इस पहल को पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने में, मानवीय मूल्यों के पोषण में, अपनी बात को बेहिचक रखने में महत्वपूर्ण माना एवं एक दूसरे के प्रति आभार व्यक्त किया ताकि इस जरूरी कार्य की नियमितता बनी रहे एवं समाज मे एक सकारात्मक बदलाव में अपना विनम्र योगदान सुनिश्चित किया जा सके |
धन्यवाद ज्ञापन के साथ परिचर्चा को अगली कड़ी तक के लिए विराम दिया गया|
इस आशा के साथ कि यह रिपोर्ट पाठकों को पुस्तक परिचर्चा को समझने और उसमे शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी |
जिसमें जुड़ने का लिंक https://meet.google.com/swt-bgrq-xup है, शामिल होकर पढ़ने-लिखने की संस्कृति पर काम करने में अपना योगदान सुनिश्चित करें और पुस्तक परिचर्चा से साहित्यिक लाभ लेते हुये अपने दिन की सार्थकता में एक और आयाम जोड़ें|
यदि आप भी समाज मे एक बेहतर बदलाव की आकांक्षा रखते हैं/ रखती हैं तो लोगों को अच्छी पुस्तकों से जोड़ना बहुत जरूरी है, उसी प्रयास का एक हिस्सा है यह परिचर्चा शृंखला|
केवल पढ़ें ही नहीं उसे अन्य लोगों के साथ साझा भी करें|
धन्यवाद
-लवकुश कुमार


विभिन्न स्थितियों के लिए खगोलदर्शी और सूक्षमदर्शी की आवर्धन क्षमता के सूत्र भी समझें और याद रखें|

किसी नियत शक्ति वाले स्रोत द्वारा एक दिये गए अंतराल में उत्सर्जित प्रकाश में दी गयी आवृत्ति या तरंग दैर्घ्य वाले फोटोन की संख्या निकालना भी सीखें|

कल शनिवार (25-07-2026) हम सबके सामूहिक प्रयास और वरिष्ठजनों के प्रोत्साहन से इकीसवीं साप्ताहिक पुस्तक परिचर्चा का ऑनलाइन आयोजन सफल रहा, जिसमें निम्नलिखित पुस्तकों पर सार्थक चर्चा हुयी:
मैडम सर – मंजरी जारूहार : बिहार की पहली महिला आई पी एस अधिकारी की आत्मकथा और संस्मरण, जीवन के संघर्षों और चुनौतियों को समझने का एक झरोखा
प्रस्तावक – जीशान अंसारी जी
तोतो चान – तेत्सुको कुरोयानागी : एक बच्ची की आत्मकथा के रूप में एक बेहतरीन और गैर परंपरागत जापानी विद्यालय की कहानी, प्राथमिक शिक्षा के शिक्षकों और माता-पिता के लिए एक बहुत जरूरी किताब|
प्रस्तावक – लवकुश कुमार
धुप्पल – भगवती चरण वर्मा : जाने माने साहित्यकार और चित्रलेखा सरीखे उपन्यास के रचयिता भगवती चरण वर्मा के जीवन के कुछ किस्से जिसमें उन्होने इस बात को रेखांकित करने का प्रयास किया है कि उनके जीवन की उपलब्धियां, मेल मिलाप उनकी लेखकीय क्षमता से ज्यादा इत्तेफाक और परिस्थितियों की दें हैं, एक पढे जाने योग्य बेबाकी से लिखी हुयी पुस्तक|
प्रस्तावक – लवकुश कुमार
कबीरा सोई पीर है- प्रतिभा कटियार : जातीय दंश और समाज में महिलाओं की स्थिति की धरातल की सच्चाई से रूबरू कराता एक बेहतरीन उपन्यास जिसमें बताया गया है कि जिस पर बीतती है वही जानता है कि क्या होता है जातिगत भेदभाव और क्यों एक औरत ही दूसरी औरत की आजादी को बांध देती है| सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते कुछ युवाओं को लेकर लिखा गया एक बेहतरीन उपन्यास|
प्रस्तावक – लवकुश कुमार
अमृता इमरोज – उमा त्रिलोक : इस पुस्तक में अमृता जी का साक्षात्कार है, जिसमें उन्होने अपने और इमरोज जी के रिश्ते पर बात की है और बात की है कि क्यों उन्हे अपने रिश्ते को सामाजिक स्वीकृति की जरूरत महसूस नहीं और उन्होने शादी नहीं की, और भी बहुत कुछ जो पाठकों को स्पष्टता दे सकता है, संस्थाओं की सार्थकता पर|
प्रस्तावक – प्रिया कश्यप
चेकमेट जिंदगी (जियो जी भर के) – प्रदीप “पंकज” : जीवन के संघर्षों, भावनात्मक पहलुओं, विविध रंगो और इसे बेहतरीन तरीके से जीने के फलसफ़ों के जानने के लिए जरूर पढ़ें या कविता संग्रह|
प्रस्तावक – आरती मैम
संघर्ष (अपने विरुद्ध) – आचार्य प्रशांत : दूसरों के विरुद्ध जाना हमेशा आसान होता है लेकिन अपने विरुद्ध जाना नहीं| जिस दिन हम अपने भीतर की लड़ाइयों को जीत लेंगे हम पाएंगे कि बाहर की लड़ाइयाँ आसान हो गयी हैं| ऐसी ही बहुत सारी स्पष्टता वाली बातों से परिचित होने के लिए जरूर पढ़ें यह पुस्तक|
प्रस्तावक – सौम्या मैम


उक्त परिचर्चा में निम्नलिखित पुस्तकसाथी शामिल रहे:
जीशान अंशारी जी, सौम्या मैम, शाश्वतम, प्रीति जायसवाल, आरती मैम, गायत्री जायसवाल, प्रिया कश्यप, उर्मिला जायसवाल, पार्थ कुमार और लवकुश कुमार |

जिनके द्वारा निम्नलिखित बिन्दु/विषय/रचनाओं का रेखांकन किया गया:
जीशान अंसारी जी :
• बिहार की पहली महिला आई पी एस अधिकारी आगे चलकर सरदार वल्लभ भाई पटेल पुलिस अकादमी की निदेशक बनती हैं यह उनकी दृढ़ता, अपने काम को लेकर सजगता और काबिलियत का ही फल है और साथ में इस देश में संविधान से मिली हमे ताकत और अवसरों में समानता का भी|
सौम्या मैम :
• सोशल मीडिया पर प्रदर्शित किया गया जीवन अक्सर झूठ होता है|
• हम जिन बातों की वजह से दुख में होते हैं कहीं न कहीं हम दुखों से तो छुटकारा चाहते हैं लेकिन बिना बातों/आदतों/चॉइस को छोड़े बिना!
प्रिया कश्यप:
• अमृता-इमरोज पुस्तक से एक अंश को उद्धृत करती हुयी कहती हैं कि शादी के बाद भी जीवन मे शांति और ईमानदारी नहीं देखने को मिलती उस अवस्था मे अगर अमृता इमरोज ने बिना शादी के भी यदि ईमानदारी से एक दूसरे का सहारा बनते हुये, एक दुसे का ख्याल रखते हुये अपना जीवन जिया है तो यह बात पहले पहल भले ही अजीब लगे लेकिन बाद में इसमे कोई खामी नहीं दिखती|
आरती मैम:
• जीवन में सघर्षों से न घबराने पर एक कविता का पाठ किया जिसका एक अंश निम्नलिखित है
ये जरूरी नहीं कि तुम जीतों ही हर बार
गलती जो भी की है उसको करो स्वीकार
बस एक रास्ता गर कभी हो भी गया बंद
तुम रोना धोना नहीं बस मुस्कुराओ मंद मंद
अब शुरू होगा तुम्हारा असली वाला इम्तिहान
जो देगा तुम्हें मौका बनाने का खुद की पहचान
मिलेगा अनुभव यहीं और पैनी होगी धार
चाहे फिर इस पार हो या हो फिर उस पार
पार्थ कुमार:
कई बाल कविताओं का पाठ किया और कुछ कहानियों का वाचन भी किया, जो सभी पुस्तक साथियों के लिए रोचक रहा और यह बात भी साबित हुयी कि बच्चों के पास कहने के लिए बहुत कुछ है बशर्ते आपके पास सुनने के लिए समय हो|
लवकुश कुमार (परिचर्चा समन्वयक):
• किसी क्षेत्र में काम करने वाले पहले इंसान को क्या क्या दिक्कतें होती हैं और वह कैसे अपनी आंतरिक दृढ़ता और स्पष्टता से इन चुनौतियों से पार पाता है या यूं कह लें कि एक पितृसत्तामक समाज में पहली महिला आई पी एस अधिकारी को कौन सी चुनौतियों से दो चार होना पड़ता है और वह उनसे कैसे पार पाती है, इस पर यदि किताब और साहित्य मौजूद हैं तो हम अन्य क्षेत्रों के लिए भी खुद को तैयार कर सकते हैं|
• बच्चों के साथ सहज होकर उन्हे समझते हुये, खेल खेल में उन्हे सिखाने, अमूमन प्रकृति के बीच सैर के दौरान फूल और फल का बनना समझाना, पौष्टिक भोजन के महत्व को इस तरह व्यक्त करना कि हर रोज टिफ़िन में कुछ समुद्र से और कुछ पहाड़ से होना जरूरी है और उन्हे अच्छा एवं खास महसूस कराते हुये और उनकी रुचियों के अनुरूप विद्यालय बनाने को लेकर लिखी गयी पुस्तक पर अपने विचार रखे|
• उक्त पुस्तक से दो पोस्टर शामिल किए जा रहे हैं, अन्य पोस्टर के लिए kumarchetna.in/poster.php पर विजिट किया जा सकता है|


पुस्तक परिचर्चा मे शामिल सभी पुस्तक साथियों (Bookmates) ने पुस्तक परिचर्चा मे शामिल होकर/अभिव्यक्ति/सराहना/भागीदारी के माध्यम से इस पहल को पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने में, मानवीय मूल्यों के पोषण में, अपनी बात को बेहिचक रखने में महत्वपूर्ण माना एवं एक दूसरे के प्रति आभार व्यक्त किया ताकि इस जरूरी कार्य की नियमितता बनी रहे एवं समाज मे एक सकारात्मक बदलाव में अपना विनम्र योगदान सुनिश्चित किया जा सके |
धन्यवाद ज्ञापन के साथ परिचर्चा को अगली कड़ी तक के लिए विराम दिया गया|

इस आशा के साथ कि यह रिपोर्ट पाठकों को पुस्तक परिचर्चा को समझने और उसमे शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी |
अगली परिचर्चा 01 अगस्त, शनिवार रात 08:30 बजे होगी(जिसका ,लिंक निम्नलिखित है - https://meet.google.com/oko-yodo-zqc ), शामिल होकर पढ़ने-लिखने की संस्कृति पर काम करने में अपना योगदान सुनिश्चित करें और पुस्तक परिचर्चा से साहित्यिक लाभ लेते हुये अपने दिन की सार्थकता में एक और आयाम जोड़ें|
केवल पढ़ें ही नहीं उसे अन्य लोगों के साथ साझा भी करें|
धन्यवाद
-लवकुश कुमार


आइए एक कहानी से शुरू करते हैं
एक आदमी सड़क के किनारे समोंसे बेचा करता था। अनपढ़ होने की वजह से अखबार नहीं पड़ता था। ऊंचा सुनने की वजह से रेडियो नहीं सुनता था, और आंखें कमजोर होने की वजह से उसने कभी टेलीविजन भी नहीं देखा था। इसके बावजूद भी वह काफी समोसे बेच लेता था। उसकी बिक्री में लगातार बढ़ोतरी होती गई। उसने और ज्यादा आलू खरीदना शुरू किया, साथ ही पहले वाले चूल्हे से बड़ा और बढ़िया चूल्हा खरीद कर ले आया। उसका व्यापार लगातार बढ़ रहा था, तभी हाल में ही कॉलेज से (बी.ए )की डिग्री हासिल कर चुका उसका बेटा पिता का हाथ बंटाने के लिए चला आया। उसके बाद एक अजीबोगरीब घटना घटी। बेटे ने उसे आदमी से पूछा,"पिता जी क्या आपको मालूम है कि हम लोग एक बड़ी मंदी का शिकार बनने वाले हैं?"
पिता ने जवाब दिया,"नहीं, लेकिन मुझे उसके बारे में बताओ।" बेटे ने कहा-"अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों बड़ी गंभीर हैं। घरेलू हालात तो और भी बुरे हैं। हमें आने वाले बुरे हालात का सामना करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।" उस आदमी ने सोचा कि उसका बेटा कॉलेज जा चुका है, अखबार पढ़ता है, और रेडियो सुनता है, इसलिए उसकी राय को हल्के ढंग से नहीं लेना चाहिए। दूसरे दिन से उसने आलू की खरीद कम कर दी, और अपना साइन बोर्ड नीचे उतार दिया। उसका जोश खत्म हो चुका था। जल्द ही उसी दुकान पर आने वालों की तादाद घटने लगी,और उसकी बिक्री तेजी से गिरने लगी । पिता ने अपने बेटे से कहा,"तुम सही कह रहे थे। हम लोग मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। मुझे खुशी है कि तुमने वक्त से पहले ही सचेत कर दिया।"
इस कहानी से हम कुछ सीख ले सकते हैं:
1. एक इंसान ज्यादा जानकार होने के बावजूद गलत फैसला कर सकता है।
2. हम अपनी सीमित समझ के मुताबिक, खुद को तुष्ट करने वाली भविष्यवाणी कर देते हैं।
शिक्षित होने का मतलब क्या है ?
सबसे बड़ी बात यह है ,कि जो लोग सफलता मिलने पर बिगड़ते नहीं, जो अपनी असलियत से मुंह मोड़ते नहीं साथ ही बुद्धिमानी, गंभीरता तथा दृढ़ता के साथ जमीन पर पैर जमाए रखते हैं। तुक्के से मिली अच्छी चीजों पर खुश होने की बजाए, मेहनत और अभ्यास से अपनी आंतरिक उच्च संभावनाओं की ओर अग्रसर होते हुये, काबिलियत को विकसित करते हुये और अध्ययन/अवलोकन जनित बुद्धि से प्राप्त कामयाबियों पर खुश होते हैं। खुश होने की ऐसी प्रवृत्ति उनमें सहज होती है|
"शिक्षित व्यक्ति एक दीपक कि तरह होता है जिस प्रकार एक दीपक एक ही स्थान पर रहकर चारों तरफ उजाला फैलाता है, ठीक उसी प्रकार एक शिक्षित व्यक्ति होता है, एक सही अर्थों में शिक्षित व्यक्ति भी ज्ञान रूपी दीपक से चारों तरफ उजाला फैलाना चाहता है।
शिक्षा का मतलब केवल किताबों से प्राप्त ज्ञान नहीं, बल्कि शिक्षा तो वह है, जो व्यक्ति को जीवन जीना सिखाए।
अगर कोई व्यक्ति मूर्खता के बजाय समझदारी, बुराई के जगह अच्छाई, और असभ्यता के बजाए सद्गुण को चुनता है, वास्तविक रूप से ऐसे व्यक्ति ही शिक्षित होते हैं।"

अज्ञान का तिमिर मिटाकर,
ज्ञान का दीप जलाती शिक्षा।
जीवन का सही अर्थ बताकर,
जीवन जीना सिखाती शिक्षा।
पत्थर को भी मूरत गढ़ती,
अनपढ़ को आकार देती शिक्षा।
हर मुश्किल को आसान बनाती,
बुद्धि को विस्तार है देती शिक्षा।
मानवता का पाठ पढ़ाती,
पंख देती है ऊंचाइयों को,
मंजिल तक पहुंचाती शिक्षा।
यह केवल अच्छे ज्ञान नहीं,
यह तो जीवन का आधार है ,
संस्कारों की मधुर बगिया,
सदाचार का उपहार है।
इसी लेख के साथ कुछ उक्तियों की तरफ ध्यान दे लिया जाए
स्वामी विवेकानन्द
"शिक्षा मनुष्य में निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है।"
महात्मा गांधी
"शिक्षा से मेरा अभिप्राय बालक और मनुष्य के शरीर, मन तथा आत्मा का सर्वांगीण विकास है।"
रवीन्द्रनाथ ठाकुर
"सर्वोच्च शिक्षा वह है जो हमें केवल जानकारी ही नहीं देती, बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सामंजस्य में लाती है।"
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
"शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि स्वतंत्र और रचनात्मक चिंतन का विकास करना है।"
नेल्सन मंडेला
"शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसका उपयोग करके आप दुनिया को बदल सकते हैं।"
अरस्तू
"हृदय को शिक्षित किए बिना बुद्धि को शिक्षित करना, शिक्षा नहीं है।"
अल्बर्ट आइंस्टीन
"शिक्षा वह है जो विद्यालय में सीखी हुई बातों को भूल जाने के बाद भी हमारे साथ रह जाती है।"
जॉन ड्यूई
"शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं है; शिक्षा स्वयं जीवन है।"
मारिया मोंटेसरी
"शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चे की स्वाभाविक क्षमताओं का विकास करना है।"
डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
"शिक्षा रचनात्मकता को जन्म देती है, रचनात्मकता सोच को, सोच ज्ञान को और ज्ञान आपको महान बनाता है।
शिक्षा का उद्देश्य परीक्षा में अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनना है।
वह शिक्षा अधूरी है जो मनुष्य में करुणा, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास न करे।
-विजयी प्रिया शर्मा
स्नातक (बी .ए ) लखनऊ विश्वविद्यालय
ईमेल :-priyasham515@gmail.com
विजयीप्रिया जी स्नातक में मानविकी की छात्रा हैं और सामाजिक विषयों पर लिखती रहती हैं, वह वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं और पढ़ने लिखने की संस्कृति को बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं| उनका मानना है कि पढ़ने लिखने वालों को एक मंच पर लाकर हम अपने विचार और जीवन/दुनिया को लेकर अपने अवलोकन ज्यादा से ज्यादा लोगों से साझा कर पाएंगे और इस तरह दुनिया और स्वयं को लेकर एक व्यापक दृष्टिकोण बना पाएंगे, महान लेखिका महादेवी वर्मा जी की रचनाएँ और व्यक्तित्व उन्हे खास पसंद हैं|
जिस तरह बूँद-बूँद से सागर बनता है वैसे ही एक समृद्ध साहित्य कोश के लिए एक एक रचना मायने रखती है, एक लेखक/कवि की रचना आपके जीवन/अनुभवों और क्षेत्र की प्रतिनिधि है यह मददगार है उन लोगों के लिए जो इस क्षेत्र के बारे में जानना समझना चाहते हैं उनके लिए ही साहित्य के कोश को भरने का एक छोटा सा प्रयास है यह वेबसाइट ।
वेबसाइट के उद्देश्य के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
अगर आपके पास भी कुछ ऐसा है जो लोगों के साथ साझा करने का मन हो तो हमे लिख भेजें नीचे दिए गए लिंक से टाइप करके या फिर हाथ से लिखकर पेज का फोटो kumarchetnapsw@gmail.com पर ईमेल करें।
